अभी अभिनय मेरा फुल-टाइम करियर नहीं है

आईपीएस अधिकारी और अभिनेत्री सिमाला प्रसाद (फिल्म: नर्मदा) से बातचीत
इंटरव्यू
अभी अभिनय मेरा फुल-टाइम करियर नहीं हैलिपिका
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प्रश्न : आपका वर्तमान पद क्या है?

उत्तर: हाल ही में मेरा प्रमोशन हुआ है और मैं अभी DIG (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल) के पद पर कार्यरत हूं। इससे पहले मैं तीन जिलों में SP के रूप में काम कर चुकी हूं। मैं 2011 बैच की IPS अधिकारी हूं।

प्रश्न : आप इतनी व्यस्त पुलिस नौकरी के साथ अभिनय कैसे मैनेज करती हैं?

उत्तर: अभी अभिनय मेरा फुल-टाइम करियर नहीं है, यह मेरी तीसरी फिल्म है। मैं सभी आवश्यक अनुमति लेकर दोनों काम संतुलित तरीके से करती हूं।

प्रश्न : एक IPS अधिकारी को फिल्म में काम करने के लिए किन-किन अनुमतियों की जरूरत होती है?

उत्तर : हमें अपने विभाग से अनुमति लेनी होती है, जो राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) तक जाती है। स्क्रिप्ट और विषय के आधार पर अनुमति दी जाती है।

प्रश्न : पुलिस अधिकारी और अभिनेता के काम में क्या अंतर है?

उत्तर: पुलिस अधिकारी के रूप में हम लोगों की समस्याओं से रूबरू होते हैं, यानी उनके जीवन का एक पहलू देखते हैं। जबकि अभिनेता के रूप में हमें पूरे किरदार का जीवन जीना होता है, जिसके लिए गहराई से रिसर्च करनी पड़ती है।

प्रश्न : फिल्म नर्मदा में आपका किरदार क्या है?

उत्तर: मैं फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही हूं और एक सब-इंस्पेक्टर का किरदार कर रही हूं। हालांकि असल जिंदगी में मेरा पद अलग है।

प्रश्न : फिल्म का नाम नर्मदा क्यों रखा गया है?

उत्तर: फिल्म में मेरे किरदार का नाम नरबदा है, जो नर्मदा नदी से प्रेरित है। कहानी में उसकी मां एक स्कूल टीचर और NGO कार्यकर्ता है, जो नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए काम करती है।

प्रश्न : क्या आपने फिल्म की कहानी में अपने अनुभव जोड़े हैं?

उत्तर: नहीं, सीधे तौर पर नहीं। लेखक ने पुलिस से जुड़े विषयों पर काफी रिसर्च की है। मुझे कहानी प्रामाणिक लगी, इसलिए मैंने इसे स्वीकार किया।

प्रश्न : क्या आपने अभिनय की कोई औपचारिक ट्रेनिंग ली है?

उत्तर : नहीं, मैंने कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं ली। स्कूल और कॉलेज के समय थोड़ा थिएटर किया था, वही मेरा अनुभव है।

प्रश्न : फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव कैसा रहा?

उत्तर: बहुत अच्छा अनुभव रहा। मेरे सह-कलाकार अनुभवी और प्रशिक्षित हैं, उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।

प्रश्न : फिल्म कब रिलीज होगी?

उत्तर: फिल्म इस गर्मियों में रिलीज होने की संभावना है, लेकिन तारीख अभी तय नहीं है।

प्रश्न : क्या आप फिल्म निर्माण के अन्य क्षेत्रों में भी काम करना चाहेंगी?

उत्तर : नहीं, मैं फिलहाल सिर्फ अभिनय पर ही ध्यान देना चाहती हूं।

प्रश्न : क्या आप दोनों करियर साथ-साथ जारी रखेंगी?

उत्तर: हां, क्योंकि दोनों का उद्देश्य समाज की सेवा करना है—एक सीधे तौर पर और दूसरा फिल्मों के माध्यम से।

प्रश्न : पुलिस व्यवस्था में क्या बदलाव आए हैं?

उत्तर: अब पुलिस में संवेदनशीलता और कम्युनिटी पुलिसिंग पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। लोग अब पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर आने में ज्यादा सहज महसूस करते हैं।

प्रश्न : महिलाओं से जुड़े अपराधों पर आपका क्या कहना है?

उत्तर: सबसे बड़ी समस्या संवेदनशीलता की कमी है। खासकर सोशल मीडिया पर पीड़ित को दोष देना या गलत टिप्पणियां करना बहुत गलत है। समाज को ज्यादा सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए।

प्रश्न : सोशल मीडिया पर लोगों को कैसे व्यवहार करना चाहिए?

उत्तर: हर व्यक्ति को जिम्मेदारी के साथ पोस्ट करना चाहिए। नकारात्मक या असंवेदनशील बातें पीड़ित को और आहत करती हैं।

प्रश्न : क्या आपने ऐसे केस संभाले हैं?

उत्तर: हां, कई मामलों को संभाला है। मैंने अपने अनुभवों पर आधारित एक किताब She Goes Missing भी लिखी है।

प्रश्न : समाज के लिए आपका संदेश क्या है?

उत्तर: हमें सबसे पहले इंसान बनना चाहिए। संवेदनशील रहें और सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी खड़े हों।

प्रश्न : आगे आप किस तरह की फिल्में करना चाहेंगी?

उत्तर: ऐसी फिल्में जो समाज को संदेश दें और वास्तविक मुद्दों को सामने लाएं।

प्रश्न : क्या आपके पास कोई नया प्रोजेक्ट है?

उत्तर: फिलहाल नहीं।

प्रश्न : क्या आप अपनी जिंदगी या किताब पर फिल्म बनाना चाहेंगी?

उत्तर: अगर सही मौका मिला तो जरूर विचार करूंगी।

-लिपिका वर्मा

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