

हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्विंकल खन्ना ने युवा डिजाइनर्स को रचनात्मकता, मौलिकता और वास्तविक दुनिया के डिज़ाइन पर अपने बेबाक विचारों से प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मशीनों में आत्मा नहीं होती -डिज़ाइन हमेशा सच्चाई और अपनेपन से आना चाहिए, न कि सिर्फ एल्गोरिदम से।”
रचनात्मक दुनिया में आ रहे बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने एआई के बढ़ते प्रभाव का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, “हम ऐसे समय में हैं जहाँ एआई हर जगह है, लेकिन वह सिर्फ एक साधन है। रचनात्मकता इंसानी ही रहनी चाहिए। मशीनों में आत्मा नहीं होती; आपकी असलियत ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।”
एआई से रचनात्मकता पर पड़ने वाले खतरे को लेकर उन्होंने कहा, “आज ऐसा समय है जब रचनात्मकता को एआई से चुनौती मिल रही है, लेकिन युवा पीढ़ी ऐसे अनोखे और साहसी विचार लेकर आती है जिन्हें कोई मशीन दोहरा नहीं सकती। यही हमारी जीत की उम्मीद है। इन युवाओं में बदलाव लाने की पूरी क्षमता है, और यही उनका सबसे बड़ा सहारा है।”
एआई के सही इस्तेमाल पर सलाह देते हुए ट्विंकल ने कहा, “इन टूल्स से दूर मत भागिए, बल्कि इन्हें अपनाइए और सही तरीके से इस्तेमाल कीजिए। बदलती दुनिया में आगे बढ़ने का यही रास्ता है।”
उन्होंने यह भी माना कि एआई टूल्स कई बार बेहतर गुणवत्ता दे सकते हैं। “इन टूल्स का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इसे मैं पूरी तरह समझा नहीं सकती, लेकिन मैंने जो कुछ इंस्टॉलेशन्स देखे, वे काफी उच्च स्तर के थे - कई मामलों में बेहतरीन।”
जेन-ज़ी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे उनकी ऊर्जा बहुत पसंद है। हम उनके बारे में बहुत कुछ कहते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि वे नई और ताज़ा सोच लेकर आते हैं। हमें कम से कम उन्हें सुनना चाहिए और उनके विचारों को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए।”
छात्रों के डिज़ाइन्स की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे फैशन की ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन इन छात्रों ने जो प्रस्तुत किया, उसमें सबसे ज्यादा मुझे उनकी सोच पसंद आई। एक डिज़ाइन में प्लास्टिक के इस्तेमाल के पीछे एक कहानी थी, जिसमें नारीवाद की झलक दिखाई दी।”
अंत में, महिलाओं के सशक्तीकरण और फैशन सहित अन्य क्षेत्रों में उनकी भूमिका पर उन्होंने कहा, “यह एक बड़ा विषय है, जिस पर विस्तार से बात करने के लिए काफी समय चाहिए।”
प्रस्तुति -लिपिका वर्मा