यह मेरे लिए सबसे बड़ा कॉम्प्लिमेंट है : तुषार कपूर

Tushar Kapoor
तुषार कपूर
Published on

अपनी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म 'फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' की शानदार सफलता के बाद अभिनेता तुषार कपूर ने अपने करियर, फिल्म मेकिंग, पिता होने के अनुभव, आध्यात्मिक सोच, अक्षय कुमार के साथ अपने रिश्ते और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बातचीत की। इस विशेष बातचीत में तुषार कपूर ने कई दिलचस्प और निजी पहलुओं पर अपनी बेबाक राय साझा की।

प्रश्न: बधाई हो! 'वेलकम टू द जंगल' ने लंबे समय से बॉक्स ऑफिस पर चल रहे सूखे के बाद बड़ी सफलता हासिल की है। आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

तुषार कपूर : बहुत-बहुत धन्यवाद। सच कहूँ तो मैं उम्मीदों के बारे में ज़्यादा नहीं सोच रहा था। मेरी सबसे बड़ी इच्छा सिर्फ़ यह थी कि फिल्म रिलीज़ हो जाए, क्योंकि इसका सफर बहुत लंबा रहा। 30 से ज़्यादा कलाकारों वाली फिल्म बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था । जब 15 मई को टीज़र रिलीज़ हुआ, तो मुझे लगा कि यह भगवान का आशीर्वाद है। उस समय सिर्फ़ फिल्म का सिनेमाघरों तक पहुंचना ही आधी जीत जैसा लगा। बेशक, यह वेलकम फ्रेंचाइज़ी है, जिसमें अहमद खान, फिरोज़ नाडियाडवाला, अक्षय कुमार और इतने शानदार कलाकार जुड़े हैं, लेकिन इतने लंबे इंतज़ार के बाद इसकी रिलीज़ अपने आप में एक जश्न थी।

प्रश्न : हाल के समय की यह सबसे बड़ी मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्मों में से एक है। इसे बनाना कितना मुश्किल था?

तुषार कपूर : यह बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि हर कलाकार को उसका उचित महत्व देना ज़रूरी था । इसका पूरा श्रेय निर्देशक अहमद खान और लेखक फरहाद सामजी को जाता है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि हर किरदार के पास यादगार पल हों और कॉमेडी करने की पूरी गुंजाइश मिले। अहमद का नियम था कि शूटिंग तभी होगी जब पूरी स्टारकास्ट मौजूद होगी । इसी वजह से शूटिंग के बीच लंबे-लंबे अंतराल आए और फिल्म बनने में काफी समय लगा। मैं मज़ाक में उनसे कहता था कि यह कॉमेडी फिल्मों की मुग़ल-ए-आज़म है।

प्रश्न : एक निर्माता के तौर पर क्या आप भविष्य में फिर इतनी बड़ी फिल्म बनाना चाहेंगे ?

तुषार कपूर : बिल्कुल, क्यों नहीं ? फिलहाल मेरा पूरा ध्यान अभिनय पर है, लेकिन अगर वेलकम टू द जंगल जैसी मज़ेदार और मनोरंजक स्क्रिप्ट मिली, तो मैं ज़रूर ऐसी फिल्म प्रोड्यूस करना चाहूँगा।

यह भले ही पूरी तरह पागलपन और ओवर-द-टॉप कॉमेडी हो, लेकिन इसके इमोशंस बिल्कुल सच्चे लगते हैं।

प्रश्न : दर्शक इस फिल्म को एक बेहतरीन स्ट्रेस-बस्टर बता रहे हैं। आपको क्या लगता है, उनसे सबसे ज़्यादा क्या जुड़ा?

तुषार कपूर : लोगों से यह सुनना कि फिल्म उनका तनाव दूर करती है, यह मेरे लिए सबसे बड़ा कॉम्प्लिमेंट है। कुछ चुटकुले शायद सीधे-सादे लगें, लेकिन फिल्म की दुनिया में वे बहुत अच्छी तरह काम करते हैं। यह भले ही पूरी तरह पागलपन और ओवर-द-टॉप कॉमेडी हो, लेकिन इसके इमोशंस बिल्कुल सच्चे लगते हैं। किरदार अजीब परिस्थितियों में भी ईमानदारी से प्रतिक्रिया देते हैं और शायद यही बात दर्शकों को जोड़ती है। इस पागलपन के पीछे भी एक तरीका है।

चाहे पुराने समय के मैनेजर हों या आज के, वे हमेशा चाहते हैं कि उनके कलाकार लगातार काम करते रहें।

प्रश्न : फिल्म में आप एक मैनेजर का किरदार निभा रहे हैं। आप इस किरदार से कितना जुड़ पाए?

तुषार कपूर : काफी हद तक। चाहे पुराने समय के मैनेजर हों या आज के, वे हमेशा चाहते हैं कि उनके कलाकार लगातार काम करते रहें। वे कलाकारों को किसी निर्माता को मना न करने की सलाह देते हैं क्योंकि हर प्रोजेक्ट अहम होता है। हां, कई मैनेजर अपने क्लाइंट्स को लेकर बेहद प्रोटेक्टिव भी होते हैं। यही बात मैं अपने किरदार से जोड़ पाया।

प्रश्न : इंडस्ट्री अब व्यक्तिगत मैनेजरों से बड़े टैलेंट एजेंसियों की ओर बढ़ गई है। आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं?

तुषार कपूर : बदलाव तो आया है। पहले मैनेजर खुद प्रोडक्शन हाउस जाकर कलाकारों के लिए काम ढूँढ़ते थे। आज मुझे लगता है कि आपका काम खुद आपकी पहचान बनाता है। एजेंसियाँ ज़्यादातर शेड्यूल, बातचीत और लॉजिस्टिक्स संभालती हैं। इसलिए मैंने हमेशा एक व्यक्तिगत मैनेजर के साथ काम करना पसंद किया है। मुझे एक भरोसेमंद रिश्ते की अहमियत ज़्यादा लगती है। मुझे नहीं लगता कि सिर्फ़ एजेंसियाँ किसी का करियर बना सकती हैं। अगर आप नए नहीं हैं, तो लोग पहले से जानते हैं कि आपकी ताकत क्या है।

प्रश्न : आपने कभी किसी बड़ी एजेंसी के बजाय व्यक्तिगत मैनेजर को ही क्यों चुना?

तुषार कपूर : मैंने कभी एजेंसी के साथ काम नहीं किया। मुझे हमेशा एक भरोसेमंद व्यक्ति के साथ काम करना ज़्यादा पसंद आया, बजाय इसके कि मैं सैकड़ों क्लाइंट्स में से एक बन जाऊँ। मेरे लिए यह सिर्फ़ प्रोफेशनल रिश्ता नहीं, बल्कि भरोसे की साझेदारी है।

प्रश्न : हाल ही में आप अपने बेटे के साथ फीफा देखने विदेश गए थे। क्या उसे फुटबॉल का बहुत शौक है?

तुषार कपूर : बिल्कुल। वह फुटबॉल का जबरदस्त दीवाना है। वह लगभग हर दिन खेलता है, रियल मैड्रिड फाउंडेशन के प्रोग्राम में ट्रेनिंग लेता है और ज़्यादातर डिफेंडर के रूप में खेलता है। लेकिन डिफेंडर होते हुए भी वह काफी गोल करता है। फुटबॉल उसकी सबसे बड़ी पसंद है।

प्रश्न : आजकल बच्चे ज़्यादातर स्क्रीन पर रहते हैं। क्या आपका बेटा अलग है?

तुषार कपूर : हां, बिल्कुल। उसे बाहर रहना बहुत पसंद है। चाहे फुटबॉल की प्रैक्टिस हो या कोई और खेल, मैदान पर रहना उसे सबसे ज़्यादा अच्छा लगता है। कभी-कभी इनडोर ट्रेनिंग होती है, लेकिन खेल उसके जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा है।

प्रश्न : एक जेन अल्फा बच्चे के पिता होने के नाते, आपको पीढ़ियों में क्या फर्क दिखाई देता है?

तुषार कपूर : हर पीढ़ी की अपनी खूबियां और कमियाँ होती हैं। मुझे लगता है कि जेन ज़ेड के कुछ लोग रिश्तों में थोड़े भावनात्मक रूप से दूर हो गए हैं, हालांकि सभी ऐसे नहीं हैं। वहीं जेन अल्फा के बच्चों की परवरिश ऐसे माता-पिता कर रहे हैं जो पहले से ज़्यादा जुड़े हुए हैं। मेरा मानना है कि बच्चों की परवरिश में माता-पिता की सक्रिय भागीदारी बेहद ज़रूरी है।

प्रश्न : पढ़ाई में आपका बेटा कैसा है ?

तुषार कपूर : वह पढ़ाई में भी बहुत अच्छा है और खेलों में भी। बस फिल्मों में उसकी कोई खास दिलचस्पी नहीं है। उसने मेरी बहुत कम फिल्में देखी हैं। आख़िरी बार उसने भूत बंगला देखी थी, क्योंकि वह एक पारिवारिक फिल्म थी।

प्रश्न : क्या वह परिवार के साथ फिल्में देखना पसंद करता है?

तुषार कपूर : हाँ, लेकिन ज़्यादातर अपने दोस्तों के साथ। हमारे घर में होम थिएटर है और वह अपने दोस्तों के साथ पॉपकॉर्न लेकर फिल्में देखना ज़्यादा पसंद करता है। उसे अपनी निजी जगह पसंद है और मैं उसका सम्मान करता हूँ।

प्रश्न : अपने बचपन और अपने बेटे के बचपन में आपको सबसे बड़ा अंतर क्या लगता है?

तुषार कपूर : हमारे समय में बाहर खेलने की आज़ादी थी, लेकिन फैसले लेने की आज़ादी कम थी। छुट्टियों में कहाँ जाना है, किससे दोस्ती करनी है-ये सब माता-पिता तय करते थे। मैं वास्तव में तब स्वतंत्र हुआ जब अमेरिका गया। अकेले रहने से आत्मविश्वास आया और वापस आने के बाद मैंने तय किया कि पारिवारिक बिज़नेस में जाने के बजाय अभिनेता बनूँगा।

प्रश्न : आज अपने करियर को आप किस नज़र से देखते हैं?

तुषार कपूर : मुझे लगता है कि मेरा करियर अब वापसी के दौर में है। एक समय ऐसा था जब अभिनय के अवसर कम हो गए थे, इसलिए मैंने मारीच जैसी फिल्में प्रोड्यूस कीं और ओटीटी प्रोजेक्ट्स किए। अब वेलकम टू द जंगल और मस्ती 4 जैसी फिल्मों के साथ चीज़ें फिर से आगे बढ़ रही हैं, जिससे मैं बेहद उत्साहित हूं।

प्रश्न: अक्षय कुमार के साथ आपका लंबा रिश्ता रहा है। उनमें आज भी क्या नहीं बदला?

तुषार कपूर : कुछ भी नहीं बदला। वह आज भी बिल्कुल वैसे ही हैं। काम के प्रति उनका समर्पण अद्भुत है। वह कभी किसी निर्माता को परेशानी में नहीं डालना चाहते और न ही किसी फिल्म में देरी करना चाहते हैं। मैं उनकी इस बात का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे लिए वह परिवार जैसे हैं।

प्रश्न: जब काम कम हो जाता है और आलोचना होती है, तो आप उससे कैसे निपटते हैं?

तुषार कपूर : यह सिर्फ़ अभिनय ही नहीं, हर पेशे का हिस्सा है। फर्क सिर्फ़ इतना है कि अभिनेता लोगों की नज़रों में रहते हैं। मुश्किल समय में मानसिक रूप से मज़बूत रहना पड़ता है और लोगों की बातों को ज़्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। मैंने उस दौरान फिल्में प्रोड्यूस कीं, इवेंट्स किए, बेटे के साथ समय बिताया और पिता के बिज़नेस में भी मदद की। ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और मौके फिर लौटकर आते हैं।

प्रश्न: आप पहले से ज़्यादा आध्यात्मिक हो गए हैं। क्या इससे आपकी सोच बदली है?

तुषार कपूर : बिल्कुल। मैंने समझ लिया है कि हर चीज़ हमारे नियंत्रण में नहीं होती। ज़िंदगी का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। सबसे अच्छा तरीका यही है कि सकारात्मक रहें, मज़बूत बने रहें और आगे बढ़ते रहें। समय आने पर चीज़ें अपने आप सही होती हैं, बस उस प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।

प्रश्न : फिल्मी परिवार से होने के बावजूद आपने संघर्ष देखा। आपकी सबसे बड़ी ताकत क्या रही ?

तुषार कपूर : मेरे हिसाब से किसी भी इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसका नज़रिया होता है। मेरी सोच हमेशा यही रही है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। चाहे जीवन का कोई भी दौर हो, काम करते रहना चाहिए। आपके आसपास हमेशा शोर रहेगा-अच्छा भी और बुरा भी। आपको सीखना होगा कि क्या सुनना है और क्या नज़रअंदाज़ करना है। अपनी सोच रखें, अपने लक्ष्य पर ध्यान दें और आगे बढ़ते रहें। मैं आज भी सीख रहा हूँ और यही मेरा जीवन मंत्र है।

प्रश्न : यानी आपका संदेश है कि नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए ?

तुषार कपूर : बिल्कुल। नकारात्मक लोगों या जहरीली बातों को अपनी मानसिक शांति पर असर मत डालने दीजिए। उन्हें उनकी जगह रहने दीजिए और अपने सफर पर ध्यान दीजिए।

प्रश्न : अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में बताइए। सुनने में आ रहा है कि आप जनादेश और गोलमाल 5 कर रहे हैं।

तुषार कपूर : जी हाँ। जनादेश मेरे लिए बेहद खास फिल्म है क्योंकि इसमें मैं कुछ बिल्कुल अलग कर रहा हूँ। लोग मुझे ज़्यादातर कॉमेडी में देखते हैं, लेकिन खाकी और शूटआउट एट लोखंडवाला की तरह यह भी एक गंभीर और अलग तरह का किरदार है। उम्मीद है कि यह भी मेरे करियर का यादगार रोल बनेगा।

प्रश्न : जनादेश में आपके किरदार के बारे में क्या बता सकते हैं?

तुषार कपूर : मैं उत्तर प्रदेश के एक विधायक का किरदार निभा रहा हूँ। फिलहाल इससे ज़्यादा नहीं बता सकता, वरना निर्माता नाराज़ हो जाएंगे । (हँसते हुए) निर्देशक चाहते थे कि सब कुछ बिल्कुल असली लगे। उन्होंने मुझे पूरी आज़ादी दी, लेकिन खूब रिहर्सल भी करवाई। उनकी सिर्फ़ एक ही हिदायत थी कि बोली जबरदस्ती या बनावटी न लगे। सब कुछ पूरी तरह स्वाभाविक दिखना चाहिए।

प्रश्न : ऐसी खबरें थीं कि आपने धमाल ठुकरा दी थी। क्या यह सच है?

तुषार कपूर : पूरी तरह नहीं। मैंने अभी-अभी क्या कूल हैं हम पूरी की थी और एक दूसरी मल्टीस्टारर कॉमेडी भी कर रहा था। उसी समय एक और वैसी ही फिल्म करना मुझे दोहराव लगा। इसलिए मैंने निर्देशक से कहा कि भविष्य में किसी अलग तरह की फिल्म में साथ काम करेंगे। बाद में उनके साथ काम करने के मौके मिले, लेकिन अब तक उनके निर्देशन में नहीं। उम्मीद है कि वह भी कभी होगा।

प्रश्न : अगर भविष्य में मौका मिले तो क्या आप धमाल फ्रेंचाइज़ी का हिस्सा बनना चाहेंगे?

तुषार कपूर : बिल्कुल। अगर अच्छा किरदार और दिलचस्प भूमिका होगी, तो मैं ज़रूर करना चाहूँगा। मैं हमेशा से इंद्र कुमार के काम का प्रशंसक रहा हूँ।

प्रश्न : आप तो लंबे समय से दिल जैसी की फिल्मों के प्रशंसक रहे हैं?

तुषार कपूर : बिल्कुल। दिल के समय से ही मैं उनकी फिल्मों का बहुत बड़ा फैन हूँ। मुझे याद है कि कॉलेज वाले हिस्से इतने पसंद थे कि हम उसकी ट्रायल स्क्रीनिंग कई बार देखने जाते थे। बाद में राजा जैसी फिल्में आईं, जिन्हें आज भी टीवी पर देखना अच्छा लगता है।

प्रश्न : क्या आप किसी साउथ इंडियन फिल्म में अभिनेता या निर्माता के रूप में काम करने की योजना बना रहे हैं?

तुषार कपूर : फिलहाल तो नहीं। करियर के शुरुआती दौर में मैंने कई साउथ फिल्मों के रीमेक किए और दक्षिण भारतीय कलाकारों के साथ भी काम किया, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं आया। फिर भी अगर सही कहानी और सही अवसर मिला, तो मैं ज़रूर करना चाहूंगा।

प्रश्न : आपके पिता जितेंद्र का दक्षिण भारतीय सिनेमा से गहरा रिश्ता रहा है। उनकी कौन-सी फिल्में आपकी पसंदीदा हैं?

तुषार कपूर : बहुत सारी। मुझे हिम्मतवाला, तोहफ़ा, मक़सद और मवाली बेहद पसंद हैं। खासकर श्रीदेवी और जया प्रदा के साथ उनकी ये फिल्में आज भी सदाबहार मनोरंजन हैं।

प्रश्न : आखिर में अपने प्रशंसकों के लिए कोई संदेश ?

तुषार कपूर : मैं बस यही उम्मीद करता हूँ कि नई फिल्मों, ओटीटी शोज़ और नए प्रोजेक्ट्स के ज़रिए आप सबसे मिलता रहूं। आपने हमेशा मुझे जो प्यार और समर्थन दिया है, उसके लिए दिल से धन्यवाद। मैं वादा करता हूँ कि आगे भी अपना सर्वश्रेष्ठ देकर आपका मनोरंजन करता रहूँगा। -लिपिका वर्मा

Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in