

फिल्म अभिनेता रणवीर सिंह के खिलाफ फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा जारी नॉन-कोऑपरेशन निर्देश को अब समाप्त कर दिया गया है। संगठन ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा करते हुए कहा कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा। FWICE के अनुसार, इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) की मध्यस्थता और अपील के बाद मामले पर दोबारा विचार किया गया। संगठन ने कहा कि फिल्म उद्योग में आपसी सहयोग, एकजुटता और सकारात्मक माहौल बनाए रखना सभी पक्षों की प्राथमिकता है, इसलिए विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने का रास्ता चुना गया।
इस दौरान FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने स्पष्ट किया कि संगठन ने कभी भी रणवीर सिंह पर प्रतिबंध नहीं लगाया था। उन्होंने कहा कि मीडिया में इसे "बैन" के रूप में प्रस्तुत करना गलतफहमी पैदा कर सकता है। उनके मुताबिक FWICE के पास किसी कलाकार को प्रतिबंधित करने का अधिकार नहीं है, बल्कि वह केवल अपने सदस्यों को किसी व्यक्ति या संस्था के साथ सहयोग न करने की सलाह दे सकता है।
गौरतलब है कि 25 मई 2026 को FWICE ने अपने सदस्यों से रणवीर सिंह की किसी भी फिल्म या प्रोजेक्ट में काम नहीं करने का आह्वान किया था। यह विवाद फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा था, जिसे एक्सेल एंटरटेनमेंट बना रहा है। आरोप था कि फिल्म की तैयारियां लगभग पूरी होने और शूटिंग शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले रणवीर ने परियोजना से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद निर्माताओं ने कथित तौर पर हुए आर्थिक नुकसान के लिए अभिनेता से 45 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि रणवीर सिंह ने FWICE को कानूनी नोटिस भी भेजा था। हालांकि नोटिस में क्या था, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। उधर, फिल्म उद्योग में बढ़ती ऐसी घटनाओं को लेकर प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी चिंता जताई है। गिल्ड का कहना है कि कई मामलों में कलाकार, निर्देशक या तकनीशियन अंतिम समय में अपने पेशेवर वादों से पीछे हट जाते हैं, जिससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। संगठन ने सभी पक्षों से संवाद और आपसी सहमति के जरिए विवादों का समाधान निकालने की अपील की है।