नीम करोली बाबा का रहस्यमयी जीवन,‘हनुमान अंश’ से जानिए कहानी

हनुमान भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े नीम करोली बाबा की कहानी ने अब बड़े पर्दे पर दर्शकों का ध्यान खींचा है।
कैंची धाम, जो नीम करोली बाबा की प्रमुख पहचान बना
कैंची धाम, जो नीम करोली बाबा की प्रमुख पहचान बनाAi generated image
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कोलकाता: आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा का नाम आज एक बार फिर चर्चा में है। वजह है उनकी जिंदगी से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’, जिसने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया है जिसकी शुरुआत में शायद ही किसी ने उम्मीद की थी। लेकिन फिल्म की सफलता को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर नीम करोली बाबा कौन थे और उनकी कहानी लोगों के बीच इतनी लोकप्रिय कैसे हुई।

कौन थे नीम करोली बाबा?

नीम करोली बाबा का मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। कम उम्र से ही उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर था। आगे चलकर उन्होंने साधु का जीवन अपनाया और उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में घूमते रहे। बाद के वर्षों में वे ‘महाराज जी’ के नाम से अपने अनुयायियों के बीच प्रसिद्ध हुए।

उनका जीवन सादगी, भक्ति और सेवा पर केंद्रित था। वे भगवान हनुमान के भक्त थे और उनके अनुयायियों में यह मान्यता रही कि बाबा का हनुमान जी से विशेष आध्यात्मिक संबंध था। उनके जीवन से जुड़े कई चमत्कारों और अनुभवों की कहानियां भी भक्तों के बीच प्रचलित हैं।

कैंची धाम बना पहचान

नीम करोली बाबा से जुड़े सबसे प्रसिद्ध स्थानों में उत्तराखंड का कैंची धाम शामिल है। नैनीताल के पास स्थित इस आश्रम की स्थापना 1960 के दशक में हुई थी और 1964 में यहां हनुमान मंदिर की स्थापना हुई। धीरे-धीरे कैंची धाम बाबा के अनुयायियों के लिए प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन गया।

बाबा की लोकप्रियता भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिकी आध्यात्मिक लेखक राम दास उनके प्रमुख शिष्यों में रहे। 1967 में भारत आने के बाद राम दास का बाबा से जुड़ाव हुआ और बाद में उनकी किताब ‘Be Here Now’ के जरिए नीम करोली बाबा का नाम पश्चिमी दुनिया के आध्यात्मिक हलकों तक भी पहुंचा।

नीम करोली बाबा का निधन 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में हुआ, लेकिन उनके आश्रम और उनसे जुड़ी कहानियां आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

हनुमान भक्ति से गहरा जुड़ाव रहा नीम करोली बाबा के जीवन का हिस्सा
हनुमान भक्ति से गहरा जुड़ाव रहा नीम करोली बाबा के जीवन का हिस्साAi, Pinterest

अब कहानी पहुंची बड़े पर्दे तक

इसी जीवन और आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित है विशाल चतुर्वेदी की फिल्म ‘हनुमान अंश’। फिल्म में शोभिनव सत्या ने नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई है। फिल्म बाबा के जीवन, उनकी यात्राओं, उनके अनुयायियों और उनसे जुड़ी आध्यात्मिक घटनाओं को कहानी का हिस्सा बनाती है।

दिलचस्प बात यह है कि करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने शुरुआत बेहद धीमी की। 7 अगस्त को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ ने पहले दिन करीब 10 लाख रुपये कमाए। पहले दो हफ्तों के बाद भी फिल्म की कमाई बेहद सीमित थी। इसके बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ ने तस्वीर बदल दी।

छठे शनिवार को फिल्म ने भारत में करीब 18.50 करोड़ रुपये की नेट कमाई की। 37 दिनों में इसकी भारत में नेट कमाई करीब 192 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि दुनियाभर में कलेक्शन 236 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया। यानी जिस फिल्म की शुरुआत सिर्फ 10 लाख रुपये से हुई थी, वही अब 250 करोड़ रुपये के आंकड़े की ओर बढ़ रही है।

‘हनुमान अंश’ की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि इसने किसी बड़े स्टार या भारी-भरकम बजट के सहारे नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व की कहानी और दर्शकों की जुड़ती दिलचस्पी के दम पर अपनी जगह बनाई है। नीम करोली बाबा की पुरानी कहानियां एक बार फिर नए दौर के दर्शकों तक पहुंच रही हैं, इस बार आश्रम से निकलकर सिनेमा के पर्दे पर।

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