खुद को बेहद भाग्यशाली महसूस करती हूं : मिथिला पालकर

मिथिला पालकर अपनी नैसर्गिक अभिनय शैली और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिली लोकप्रियता के लिए पहचानी जाती हैं। अपनी वेब सीरीज सुपर सुब्बू को लेकर चर्चा में हैं। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश
मिथिला पालकर
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सुपर सुब्बू की सफलता के लिए बधाई। अपने तेलुगु डेब्यू और शो की सफलता को लेकर कैसा महसूस कर रही हैं?

मिथिला पालकर : बहुत-बहुत धन्यवाद! मैं सच में बेहद खुश हूं। दर्शकों ने इस शो को जिस तरह प्यार दिया है, वह मेरे लिए बहुत खास है। रिलीज़ के दो हफ्ते बाद भी यह नेटफ्लिक्स इंडिया के टॉप 10 शो में बना हुआ है, जो मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। जब पहली बार मैंने सुना कि यह सीरीज़ सेक्स एजुकेशन जैसे विषय को कॉमेडी के साथ पेश करती है, तो मुझे उत्सुकता भी हुई और थोड़ा संकोच भी था। यह ऐसा विषय है जिसे अगर संवेदनशीलता से न दिखाया जाए, तो वह भद्दा लग सकता है। इसलिए मैं कहानी और स्क्रिप्ट को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहती थी। निर्देशक मलिक राम ने जब मुझे कहानी सुनाई और मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तो उसी वक्त तय कर लिया कि मुझे इसका हिस्सा बनना है। स्क्रिप्ट बेहद खूबसूरती से लिखी गई थी और इसे बहुत ईमानदारी और दिल से बनाया गया है।

हमने सुना कि आपने अपने तेलुगु डायलॉग्स खुद बोले हैं। नई भाषा सीखना कितना मुश्किल था?

मिथिला पालकर : (हंसते हुए) जी हां, मैंने अपने तेलुगु डायलॉग्स खुद बोले और यह मेरे लिए एक शानदार अनुभव रहा। इस पहले मैंने एक तमिल फिल्म में भी अपने डायलॉग्स खुद बोले थे, हालांकि डबिंग नहीं की थी। नई भाषा सीखना हमेशा रोमांचक होता है क्योंकि इससे आप अपने किरदार और उस संस्कृति से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं।

अपने करियर को पीछे मुड़कर देखें तो वायरल कप सॉन्ग से लेकर इरफान खान और दुलकर सलमान जैसे कलाकारों के साथ काम करने तक आपने कई शानदार प्रोजेक्ट किए हैं। क्या खुद को भाग्यशाली मानती हैं?

मिथिला पालकर : बिल्कुल। जब भी मैं उन लोगों के बारे में सोचती हूं जिनके साथ मुझे काम करने का मौका मिला, तो खुद को बेहद भाग्यशाली महसूस करती हूं। आज भी वह सूची देखकर हैरानी होती है। हर प्रोजेक्ट ने मुझे कुछ नया सिखाया है और मैं इनमें से किसी भी मौके को हल्के में नहीं लेती।

हमने सुना है कि शुरुआत में आपका परिवार आपके अभिनय करियर के पक्ष में नहीं था। क्या यह सच है?

मिथिला पालकर : जी हां, खासकर मेरे नाना। हम एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार से हैं, इसलिए फिल्म इंडस्ट्री को लेकर उनकी स्वाभाविक चिंताएं थीं। वे चाहते थे कि मैं पहले अपनी पढ़ाई पूरी करूं क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं मैं बीच में पढ़ाई न छोड़ दूं । मैंने उनकी बात मानी, मास मीडिया में ग्रेजुएशन पूरा किया और थिएटर कंपनी में भी काम किया। जब उन्होंने मेरा समर्पण देखा, तो उनका नजरिया बदल गया और उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो समझ आता है कि उनकी चिंता सिर्फ मेरे भविष्य को लेकर थी।

सुपर सुब्बू सेक्स एजुकेशन जैसे विषय पर आधारित है। आपको क्या लगता है कि आज भी लोग इस विषय पर खुलकर बात करने से क्यों झिझकते हैं?

मिथिला पालकर : मुझे लगता है कि इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी परवरिश और सोच है। बचपन से हमें सिखाया जाता है कि "सेक्स" शब्द पर बात करना गलत या शर्म की बात है।

लेकिन सेक्स एजुकेशन सिर्फ सेक्स तक सीमित नहीं है। इसमें सहमति (कंसेंट), प्रजनन स्वास्थ्य, महिलाओं की सेहत, शरीर के प्रति जागरूकता जैसी कई जरूरी बातें शामिल हैं।

हमारी कोशिश यही रही है कि इन विषयों को संवेदनशीलता और हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया जाए ताकि लोग सहज होकर इन पर बात कर सकें।

क्या आपके स्कूल में भी सेक्स एजुकेशन सही तरीके से पढ़ाई जाती थी?

मिथिला पालकर : सच कहूं तो नहीं। मुझे याद है कि जब स्कूल में पीरियड्स और मासिक धर्म पर सत्र होता था, तब सिर्फ लड़कियों को बुलाया जाता था और लड़कों को खेल खेलने भेज दिया जाता था।

आज सोचती हूं तो लगता है कि इसका कोई मतलब नहीं था। लड़कों को भी इन विषयों की जानकारी होनी चाहिए। उम्मीद करती हूं कि अब हालात बेहतर हुए होंगे, लेकिन अगर नहीं हुए हैं तो अभी भी बहुत काम बाकी है।

आपका किरदार उन शहरी भूमिकाओं से बिल्कुल अलग है जिनमें दर्शकों ने आपको पहले देखा है। आपने इसकी तैयारी कैसे की?

मिथिला पालकर : मैंने अपने निर्देशक पर पूरा भरोसा किया। तेलंगाना के एक गांव की लड़की का किरदार निभाना मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव था और यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती थी।

लुक टेस्ट के दौरान निर्देशक ने मुझे गांव की महिलाओं की बॉडी लैंग्वेज, हावभाव और बोलचाल के तरीके समझाए। मैंने कोशिश की कि हर छोटी-बड़ी बात को आत्मसात करूं और अपने अभिनय में पूरी ईमानदारी से उतारूं। पूरा सफर मुझे बहुत पसंद आया।

प्रश्न: कई लोगों का मानना था कि आपका लुक काफी शहरी है और आप गांव की लड़की नहीं लगेंगी। इस पर आपका क्या कहना है?

मिथिला पालकर : मुझे नहीं लगता कि इसका खूबसूरती से कोई संबंध है। लोगों ने मुझे ज्यादातर शहरी किरदारों में देखा है, इसलिए उनके मन में मेरी वही छवि बन गई थी।

मैं अपने निर्देशक की आभारी हूं कि उन्होंने उन धारणाओं से आगे बढ़कर मुझे इस भूमिका के लिए चुना। एक अभिनेता के तौर पर हमें ऐसे फिल्मकारों की जरूरत होती है जो जोखिम उठाने का साहस रखें।

जब निर्देशक ने आपको यह भूमिका ऑफर की, तो क्या आप खुद भी हैरान थीं?

मिथिला पालकर : उन्होंने कई इंटरव्यू में इस बारे में बात की है। उन्हें कलाकारों को उनकी बनी-बनाई छवि से बिल्कुल अलग भूमिकाओं में कास्ट करना पसंद है। अगर कोई कॉमेडी के लिए मशहूर है तो वे उसे गंभीर भूमिका देते हैं और अगर कोई हमेशा गंभीर किरदार निभाता है तो उसे हल्का-फुल्का किरदार देते हैं। मेरे साथ भी उन्होंने यही किया और मैं उनकी इस सोच के लिए शुक्रगुजार हूं।

पहले कलाकार अक्सर एक ही तरह की भूमिकाओं में सीमित हो जाते थे। क्या आपको डर है कि यह किरदार भी आपकी पहचान बन जाएगा ?

मिथिला पालकर : उम्मीद है ऐसा नहीं होगा। मेरे लिए सबसे अहम चीज़ कहानी है। अगर भविष्य में फिर किसी गांव की लड़की का किरदार मिलेगा और कहानी अच्छी होगी, तो जरूर करूंगी। लेकिन सिर्फ एक जैसी भूमिका निभाने के लिए नहीं।

क्या सुपर सुब्बू की सफलता के बाद दक्षिण भारतीय फिल्मों से नए ऑफर आने शुरू हो गए हैं?

मिथिला पालकर : जी हां, कुछ ऑफर आए हैं। अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है, लेकिन यह देखकर अच्छा लगता है कि लोग मेरे काम को पसंद कर रहे हैं।

शो के बाद आपको मिला सबसे यादगार कॉम्प्लिमेंट कौन-सा था?

मिथिला पालकर : सबसे खूबसूरत तारीफ मुझे तब मिली जब तेलुगु दर्शकों ने कहा कि उन्हें स्क्रीन पर मिथिला पालकर नहीं, बल्कि तेलंगाना के गांव की एक लड़की दिखाई दी। एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट शायद ही कोई हो सकता है।

आपने सोशल मीडिया से लोकप्रियता हासिल की। आज सोशल मीडिया को किस तरह देखती हैं?

मिथिला पालकर : सोशल मीडिया पहले से काफी बदल चुका है। जब मैंने कप सॉन्ग बनाया था, तब मैं एल्गोरिदम या रणनीति के बारे में नहीं सोचती थी। मैं सिर्फ मज़े के लिए कंटेंट बनाती थी। आज हर पोस्ट डालने से पहले बहुत ज्यादा सोचना पड़ता है—लाइटिंग कैसी है, पोस्ट करने का सही समय क्या है, लोग पसंद करेंगे या नहीं।

हाल ही में मैंने खुद को याद दिलाया कि मैंने शुरुआत सिर्फ खुशी के लिए की थी, परफेक्शन के लिए नहीं। अब मैं उसी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहती हूं।

अभिनय के अलावा आपके शौक क्या हैं?

मिथिला पालकर : काश मैं कह पाती कि मुझे किताबें पढ़ना बहुत पसंद है, लेकिन सच यह है कि मैं बहुत धीमी रीडर हूं।

हाल ही में मैंने फिर से संगीत सीखना शुरू किया है और मुझे इसमें बहुत आनंद आता है। इसके अलावा मुझे खाना और सोना बेहद पसंद है। (हंसते हुए) ।

क्या भविष्य में प्रोफेशनल सिंगर बनने का भी सपना है?

मिथिला पालकर : ज़रूर है, लेकिन अभी मैं सीख रही हूं। इंस्टाग्राम पर गाना गाना और लाइव स्टेज पर गाना बिल्कुल अलग बातें हैं। लाइव परफॉर्मेंस आज भी मुझे थोड़ा नर्वस कर देती है। फिलहाल मेरा पूरा ध्यान अपनी आवाज़ को समझने, शास्त्रीय संगीत की बुनियाद सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने पर है।

आखिर में अपने दक्षिण भारतीय प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?

मिथिला पालकर : मैं दिल से आप सभी का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया और मुझे तेलंगाना के गांव की एक लड़की के रूप में अपनाया। आपका प्यार मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मुझे उम्मीद है कि यह दक्षिण भारत में मेरी यात्रा की सिर्फ शुरुआत है। मैं जल्द ही फिर लौटूंगी—बड़ी स्क्रीन पर और अलग-अलग भाषाओं में। आप सभी का दिल से धन्यवाद। -लिपिका वर्मा

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