

इंडियन आइडल सीज़न 16 जीतने पर बहुत-बहुत बधाई! जब विजेता के तौर पर आपके नाम की घोषणा हुई, उस समय आपके मन में क्या चल रहा था ?
बहुत-बहुत धन्यवाद! सच कहूँ तो मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि क्या होने वाला है। नाम घोषित होने से पहले दिल की धड़कनें तेज़ थीं, लेकिन कहीं न कहीं मुझे इस पल पर पूरा विश्वास था। मैंने इस जीत की हमेशा कल्पना की थी। सबसे ज़्यादा जो भावना थी, वह कृतज्ञता की थी। इंडियन आइडल का यह सफर मेरे लिए सिर्फ़ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव रहा जिसने मुझे एक कलाकार और इंसान-दोनों रूपों में बदल दिया।
आपकी शास्त्रीय संगीत की नींव बहुत मज़बूत है। संगीत की शुरुआत कब हुई और आपके गुरु कौन रहे ?
मैंने तीसरी कक्षा से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया। राउरकेला (ओडिशा) में बुद्ध प्रसाद राव सर से मेरी शुरुआती तालीम हुई। बाद में भुवनेश्वर आकर मैंने अपने वर्तमान गुरु बालकृष्ण भैरा सर से शिक्षा ली। इसके साथ ही मैंने बॉलीवुड और सुगम संगीत की ट्रेनिंग गुरु शारदा प्रसन्न साहू जी से ली। दुर्भाग्य से 2023 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी सीख आज भी मेरे साथ है। उन्होंने मुझे सिर्फ़ गाना नहीं, बल्कि हर गीत की भावना को खूबसूरती से व्यक्त करना सिखाया। मेरे करियर को संवारने में उनका बहुत बड़ा योगदान है।
आपने कहा कि आपने इस जीत को पहले ही ‘मैनिफेस्ट’ कर लिया था। क्या आपको हमेशा विश्वास था कि आप इंडियन आइडल जीतेंगे ?
जी हाँ। मुझे हमेशा विश्वास था कि मैं यह ट्रॉफी जीत सकती हूँ। मैं रोज़ खुद को इस मंच पर विजेता के रूप में देखती थी। लेकिन सिर्फ़ सपने देखना काफी नहीं होता, उनके लिए लगातार मेहनत भी करनी पड़ती है। मेरे लिए विश्वास और मेहनत दोनों साथ-साथ चले।
इंडियन आइडल जीतने पर आपको ₹20 लाख की पुरस्कार राशि मिली है। क्या आपने तय किया है कि इसका क्या करेंगे ?
(हँसते हुए) अभी तो नहीं। मेरे पिताजी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, इसलिए मुझे पूरा भरोसा है कि वह इस राशि का सही इस्तेमाल और सही निवेश करेंगे। फिलहाल मैं सिर्फ़ इस खूबसूरत पल का आनंद लेना चाहता हूँ।
अब आगे आपकी क्या योजनाएँ हैं ?
सबसे पहले मैं भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक भजन रिकॉर्ड करना चाहती हूँ। मुझे लगता है कि मेरी पूरी यात्रा उन्हीं के आशीर्वाद से संभव हुई है, इसलिए मैं अपना पहला प्रोजेक्ट उन्हें समर्पित करना चाहती हूँ। इसके अलावा मेरे कुछ हिंदी गाने रिकॉर्ड होने हैं और ओड़िया संगीत के भी कई प्रोजेक्ट्स हैं, जिन पर अब मैं काम शुरू करूंगी।
अगर भविष्य में आपको एक साथ हिंदी और ओड़िया गानों के ऑफर मिलें, तो आप किसे प्राथमिकता देंगी ?
मुझे नहीं लगता कि किसी गीत की भाषा उसकी पहुँच तय करती है। अगर संगीत में ताकत है, तो वह पूरी दुनिया तक पहुँच सकता है। Despacito और Gangnam Style इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। लाखों लोगों को उनके बोल समझ नहीं आते, फिर भी वे दुनिया भर में लोकप्रिय हुए। इसी तरह ओडिशा का लोक संगीत भी वैश्विक पहचान बना सकता है। रंगबती जैसे गीत इसकी मिसाल हैं। अगर कभी ऐसी स्थिति आई, तो मैं दोनों प्रोजेक्ट्स को संतुलित करने की पूरी कोशिश करूँगी।
आपके माता-पिता ने हमेशा आपका साथ दिया। उन अभिभावकों के लिए आपका क्या संदेश है, जो अपने बच्चों के सपनों का समर्थन नहीं करते ?
मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ कि मेरे माता-पिता ने हमेशा मुझ पर विश्वास किया। मैं हर माता-पिता से कहना चाहूँगी कि अपने बच्चों पर भरोसा रखें। उन्हें अपनी पसंद का रास्ता चुनने का अवसर दें। हर बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है और सही सहयोग मिलने पर वह ज़रूर आगे बढ़ता है।
इंडियन आइडल के दौरान आपने कई दिग्गज कलाकारों के सामने प्रस्तुति दी। कौन-सी मुलाकात आपके लिए सबसे यादगार रही ?
ज़ीनत अमान मैम से मिलना मेरे लिए बेहद खास अनुभव था। मैंने उनके सामने लैला मैं लैला और बाद में दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी गाया। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं उनके दौर में गाती, तो शायद मेरी आवाज़ पर उनके गाने फिल्माए जाते। यह मेरे लिए बहुत बड़ी तारीफ़ थी । इसके अलावा पूनम ढिल्लों मैम ने भी मेरी प्रस्तुति की सराहना की। मिथुन चक्रवर्ती सर से मिलना भी बेहद यादगार रहा। उन्होंने मुझसे ओड़िया भाषा में बात की, जिससे मुझे बहुत अपनापन महसूस हुआ।
क्या भविष्य में अभिनय करने की भी इच्छा है ?
हाँ, लेकिन मैं सिर्फ़ अपने ही गानों में अभिनय करना चाहूँगा। खास तौर पर भक्ति गीतों में अभिनय करने की मेरी इच्छा है, क्योंकि उनसे मेरा भावनात्मक जुड़ाव बहुत गहरा है।
पिछले कुछ समय से आपकी आध्यात्मिक सोच भी काफी गहरी हुई है। क्या बचपन से ही ऐसा था ?
नहीं, ऐसा पहले नहीं था। पिछले एक-दो वर्षों में मैं आध्यात्मिकता की ओर अधिक आकर्षित हुई हूँ। भगवद्गीता पढ़ने, महाभारत देखने और भगवान जगन्नाथ के बारे में जानने के बाद मेरी सोच बदल गई। जितना मैंने उन्हें जाना, उतना ही उनसे जुड़ती चली गयी । आज आध्यात्मिकता मुझे शांति, शक्ति और सही दिशा देती है।
आपकी सगाई हो चुकी है। आपके मंगेतर ने इस सफर में आपका कितना साथ दिया ?
मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानती हूँ कि मुझे ऐसा जीवनसाथी मिला है जो मेरे काम को पूरी तरह समझता है। वह कॉर्पोरेट क्षेत्र से हैं, लेकिन हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं। वह ज़्यादा भावनाएँ व्यक्त नहीं करते, लेकिन हमेशा पूछते हैं कि मेरा रियाज़ कैसा चल रहा है और मुझे लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह शांत समर्थन मेरे लिए बहुत मायने रखता है।
आपकी जीत के दौरान भगवान जगन्नाथ से जुड़े कई खूबसूरत संयोग भी देखने को मिले। क्या आपको लगता है कि यह ईश्वर का आशीर्वाद था ?
बिल्कुल। इस पूरी यात्रा में कई ऐसे संयोग हुए, जिन्हें देखकर मुझे लगा कि भगवान का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहा। मैं बस उनके प्रति कृतज्ञ हूँ और यही प्रार्थना करती हूँ कि आगे भी उनका स्नेह और मार्गदर्शन मुझे मिलता रहे।
इंडियन आइडल में आने का सपना देखने वाले युवाओं को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
मेरा सफर आसान नहीं था। इसमें बहुत उतार-चढ़ाव आए। लेकिन अगर आपका विश्वास और मेहनत कायम रहे, तो हर मुश्किल का फल मीठा होता है। अगर आपका चयन हो गया है, तो इसका मतलब है कि आपके अंदर कुछ खास है। खुद पर भरोसा रखिए, लगातार मेहनत कीजिए, सीखते रहिए और कभी हार मत मानिए। सफलता एक दिन ज़रूर मिलेगी।
अंत में, आपके लिए यह जीत क्या मायने रखती है ?
यह ट्रॉफी मेरे लिए सिर्फ़ एक जीत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। मैं अपने परिवार, अपने गुरुओं, अपने मार्गदर्शकों, दर्शकों और उन सभी लोगों का दिल से आभारी हूँ जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया। आगे भी मैं ऐसा संगीत बनाना चाहती हूँ, जो लोगों के दिलों को छू सके और उन्हें गर्व महसूस कराए। -लिपिका वर्मा