'हमें अपने टैलेंट पर विश्वास रखना चाहिए'

रायपुर की गलियों से निकलकर देश के सबसे बड़े डांस रियलिटी मंच तक का सफर तय करने वाले रितेश पाल ने अपनी मेहनत, हुनर और जुनून से एक खास पहचान बनाई है। अपने कोरियोग्राफर प्रतीक उतेकर के साथ मिलकर रीतेश ने इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीजन 5 की ट्रॉफी अपने नाम कर रितेश ने साबित किया कि टैलेंट किसी बड़े शहर या सुविधाओं का मोहताज नहीं होता। स्वतंत्र पत्रकार लिपिका वर्मा ने विशेष बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश -
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रीतेश पाल और कोरियोग्राफर प्रतीक उतेकर
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‘इंडिया वाला डांस’ थीम पर सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीजन 5 में महीनों तक शानदार परफॉर्मेंस और यादगार डांस मोमेंट्स देने के बाद रायपुर के रितेश पाल ने अपने कोरियोग्राफर प्रतीक उतेकर के साथ मिलकर इस सीजन की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीजन 5 के विजेता रितेश पाल और उनके कोरियोग्राफर प्रतीक उतेकर ने अपनी जीत के सफर, शो जीतने की खुशी, भारतीय नृत्य और फिटनेस के महत्व, जजों से मिली सीख, सफलता के बाद जमीन से जुड़े रहने और रितेश के भविष्य के प्लान्स को लेकर काफी कुछ बताया।

रीतेश, इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीजन 5 जीतने के लिए बहुत-बहुत बधाई। खुद को ‘इंडियाज़ बेस्ट डांसर’ कहलाते हुए कैसा महसूस हो रहा है?

रीतेश पाल : यह मेरे लिए वाकई बहुत खास एहसास है। मेरे लिए नाम और शोहरत का मतलब लोगों की सराहना है। जब हम मेहनत करते हैं और लोग हमारे काम की तारीफ करते हैं, तो उससे बड़ी उपलब्धि और क्या हो सकती है। लेकिन मैं इन तारीफों को अपने सिर पर नहीं चढ़ाना चाहता। मैं इन्हें ऐसी सीढ़ियों की तरह देखता हूं, जो मुझे आगे बढ़ने में मदद करती हैं। मैं हर उपलब्धि का सम्मान करता हूं, ठीक उसी तरह जैसे हम मंदिर की सीढ़ियों का सम्मान करते हैं। ये उपलब्धियां मेरे लक्ष्य तक पहुंचने की सीढ़ियां हैं। इसलिए मैं इन्हें अपने पैरों के नीचे रखकर आगे बढ़ते रहना चाहता हूं।

प्रतीक, आप काफी लंबे समय से इंडस्ट्री में हैं और ऐसे डांसर्स को मेंटर करने के लिए जाने जाते हैं, जो अक्सर फिनाले तक पहुंचते हैं। एक कोरियोग्राफर के तौर पर आपका तरीका क्या है?

प्रतीक उतेकर : मुझे लगता है कि जब आप किसी युवा कंटेस्टेंट को मेंटर कर रहे होते हैं, तो सबसे बड़ी जिम्मेदारी आपकी होती है। एक कोरियोग्राफर के तौर पर हम एक शो से दूसरे शो में जा सकते हैं, लेकिन किसी कंटेस्टेंट के लिए एक शो उसकी पूरी जिंदगी बदल सकता है। इसलिए बहुत दबाव और जिम्मेदारी होती है। आप उन्हें गलत दिशा में ले जाने का जोखिम नहीं उठा सकते। खासकर जब आपके साथ रितेश जैसा बेहतरीन डांसर हो, तो मुझे लगता है कि मुझे उससे दोगुनी मेहनत करनी होगी ताकि मैं उसे सही दिशा दे सकूं। लेकिन साथ ही यह बेहद संतोष देने वाला अनुभव भी है। एक कोरियोग्राफर की सबसे बड़ी खुशी यही होती है कि उसका काम किसी डांसर के जरिए स्टेज पर जीवंत होता हुआ दिखाई दे।

आप काफी एनर्जेटिक हैं और बहुत फिट भी हैं। आपका फिटनेस मंत्र क्या है?

प्रतीक उतेकर : मुझे लगता है कि सबसे बड़ा मंत्र है हेल्दी खाना। अगर आप नियमित रूप से डांस करते हैं और हेल्दी खाना खाते हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से फिट रहेंगे। डांस अपने आप में एक बेहतरीन एक्सरसाइज है, इसलिए जरूरी नहीं कि आपको अपना पूरा समय जिम में बिताना पड़े।

और आपने रितेश को कौन सा फिटनेस मंत्र दिया ?

प्रतीक उतेकर : सच कहूं तो वह मुझसे ज्यादा फिट है! शायद देखने में ऐसा न लगे, लेकिन वह आज की जनरेशन वाली फिटनेस, खासकर कोर फिटनेस, में काफी इंटरेस्टेड है। उसके लिए फिटनेस और डांस एक साथ बहुत खूबसूरती से जुड़े हुए हैं। इसी कॉम्बिनेशन ने उसे इंडियाज़ बेस्ट डांसर बनने में काफी मदद की है।

इस सीजन में खास तौर पर भारतीय नृत्य और जड़ों से जुड़े परफॉर्मेंस पर फोकस किया गया। आप दोनों ने इससे क्या सीखा ?

प्रतीक उतेकर : यह हम दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। मेरी ट्रेनिंग और डांस की पढ़ाई मुख्य रूप से कंटेम्पररी डांस में हुई है, इसलिए हम मॉडर्न स्टाइल्स से ज्यादा परिचित थे। लेकिन इस सीजन में भारतीय नृत्य की बुनियाद को सामने लाना जरूरी था। हम अक्सर पेड़, उसके फल, फूल और शाखाओं की बात करते हैं, लेकिन उसकी जड़ें कहां हैं? हम उन्हीं जड़ों तक वापस जाना चाहते थे। हर हफ्ते हमें उस भारतीय नर्व और भारतीय आत्मा को स्क्रीन पर वापस लाना था। हम चाहते थे कि दर्शक उस तरह का एहसास महसूस करें, जैसा हमने 80 और 90 के दशक में देखा था।

रितेश, आप छत्तीसगढ़ से हैं, जिसकी अपनी मजबूत सांस्कृतिक पहचान है। आपकी जड़ों ने आपकी इस यात्रा में कितनी अहम भूमिका निभाई है ?

रितेश पाल : मेरी जड़ें मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। मैं छत्तीसगढ़ से आता हूं और सांस्कृतिक रूप से हम अपनी जड़ों से बहुत जुड़े हुए हैं। मुझे खुशी होती है कि डांस के जरिए मैं उस जगह को रिप्रेजेंट कर पा रहा हूं, जहां से मैं आता हूं। भारत में बहुत टैलेंट है और कोई भी शहर या जगह छोटी नहीं होती। अगर आपके अंदर टैलेंट है और आप मेहनत करते हैं, तो आप कहीं भी पहुंच सकते हैं।

आप किस जज से सबसे ज्यादा जुड़े हुए हैं ?

रितेश पाल : मुझे सभी जज बहुत पसंद हैं-गीता मां, करिश्मा मैम, जावेद सर और टेरेंस सर। लेकिन मैं खास तौर पर गीता मां और टेरेंस सर से ज्यादा जुड़ा हुआ हूं। गीता मां मेरे लिए मां जैसी हैं। मैंने उनसे कई बार बात की है और वह हमेशा मेरे साथ बहुत प्यार और सपोर्ट के साथ पेश आई हैं।

जब आप पहली बार प्रतीक की टीम से मिले, तो आपने उनसे क्या सीखा?

रितेश पाल : वे सभी बहुत एनर्जेटिक थे और हमेशा हंसते-मुस्कुराते और मस्ती करते रहते थे। हमारी पहली रिहर्सल के दौरान सर ने मुझे एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा, “इन तीन-चार महीनों को पूरी तरह जियो। परफॉर्मेंस को लेकर भी ज्यादा चिंता मत करो और जीत या हार के बारे में भी मत सोचो।” उन्होंने कहा कि ये पल दोबारा वापस नहीं आएंगे। इसलिए मुझे इन्हें जीना और इनसे प्यार करना चाहिए। उनकी यह बात पूरे शो के दौरान मेरे साथ रही।

आप दोनों कंटेम्पररी और मॉडर्न डांस बैकग्राउंड से आते हैं। इस सीजन में पुराने बॉलीवुड गानों और स्टाइल्स के लिए आपने खुद को कैसे तैयार किया?

प्रतीक उतेकर : हर हफ्ते हमें वापस जाकर उन जड़ों को समझना पड़ता था। जब हेलेन मैम के गाने आए, तो हमने हेलेन मैम के बारे में स्टडी किया। जब मीनाक्षी मैम के गाने आए, तो हमने उनके बारे में जाना। यह सिर्फ कोई गाना देखकर उसकी कोरियोग्राफी कॉपी करने की बात नहीं थी। हमें उस गाने की नर्व समझनी थी-उस गाने को खास क्या बनाता है, उसका एसेंस क्या है और उस गाने का असली “नमक” क्या है। इस तरह का होमवर्क हमारी कंटेम्पररी डांस ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं था। हमें जड़ों को समझना पड़ा ताकि रिहर्सल के समय मैं रितेश को सही तरीके से गाइड कर सकूं। जब करिश्मा मैम सामने बैठी होती थीं और हम ऋषि सर और उनकी विरासत से जुड़े गानों पर परफॉर्म कर रहे होते थे, तो हमें और भी ज्यादा सावधान रहना पड़ता था, क्योंकि वे गाने उनके परिवार से जुड़े हैं और वह उस विरासत को बहुत गहराई से समझती हैं।

आप आज के समय में बॉलीवुड डांस के परफॉर्म करने के तरीके में क्या बदलाव या नई ताजगी लाना चाहते थे ?

प्रतीक उतेकर : आज की जनरेशन हर बीट को हिट करने और हर मूवमेंट को शार्प रखने पर बहुत ज्यादा ध्यान देती है। लेकिन कहीं न कहीं परफॉर्मेंस का दिल और आत्मा खो सकती है। इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीजन 5 ने उस जिंदगी और आत्मा को वापस लाने की कोशिश की। मेरा मानना है कि ऐसा तब होता है जब आप किसी चीज को दिल से परफॉर्म करते हैं और गाने के एसेंस को समझते हैं। चाहे वह पर्दा है पर्दा हो, दिल के झरोखे हो या कोई और गाना-अगर आप उसका एसेंस समझते हैं, तो आप दर्शकों से जुड़ सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड डांस उतना आसान नहीं है, जितना ज्यादातर लोग सोचते हैं?

प्रतीक उतेकर : लोग सोचते हैं कि बॉलीवुड डांस आसान है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसे सही तरीके से परफॉर्म करने के लिए आपको म्यूजिक, इमोशन, उस दौर और किरदार को समझना पड़ता है।

रितेश, शो के दौरान बतौर डांसर आपके अंदर सबसे बड़ा बदलाव क्या आया?

रितेश पाल : पहले जब भी मैं डांस करता था, तो कोशिश करता था कि हर एक बीट पकड़ूं। मैं हर चीज को हिट करना चाहता था। लेकिन जब मैं इंडियाज़ बेस्ट डांसर में आया, तो जजों ने मुझे सिखाया कि आपको हर बीट पकड़ने की जरूरत नहीं है। कभी-कभी आपको रुकना चाहिए, रिलैक्स करना चाहिए और सांस लेनी चाहिए। आपको उस पल को जीना होता है। यह मेरे लिए बहुत बड़ी सीख थी। कभी-कभी सिर्फ रुककर एक एक्सप्रेशन देना दस मूवमेंट करने से ज्यादा असरदार हो सकता है। अब जब भी मैं परफॉर्म करता हूं, तो यह समझने की कोशिश करता हूं कि कहां रुकना है, कहां एक्सप्रेशन देना है और दर्शकों से जुड़ना है, फिर वापस बीट्स या लिरिक्स पर जाना है।

क्या आप भविष्य में भारतीय शास्त्रीय नृत्य सीखना चाहेंगे ?

रितेश पाल : हां। भारतीय शास्त्रीय नृत्य सबसे मुश्किल डांस फॉर्म्स में से एक है। कथक और दूसरे क्लासिकल फॉर्म्स के लिए बहुत अनुशासन और ट्रेनिंग की जरूरत होती है।

प्रतीक उतेकर : मैं निश्चित रूप से चाहता हूं कि रितेश क्लासिकल डांस फॉर्म्स की भी ट्रेनिंग ले। इससे वह एक और ज्यादा कम्प्लीट डांसर और परफॉर्मर बनेगा।

रितेश, आपने हाल ही में ‘प्रो छत्तीसगढ़ डांसर’ का खिताब जीता और अब इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीजन 5 भी जीत लिया। आप अपनी इस यात्रा को किस तरह देखते हैं?

रितेश पाल : मैं भविष्य के बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोचता। मुझे वर्तमान में जीना पसंद है। अभी मैं इस पल को एंजॉय करना चाहता हूं और इस एहसास को महसूस करना चाहता हूं कि मैं इंडियाज़ बेस्ट डांसर हूं। बेशक, आगे चलकर मैं भविष्य के बारे में सोचूंगा, लेकिन इस समय मैं वर्तमान को जीना चाहता हूं।

जब आपने जीत हासिल की, तो आपके परिवार का क्या रिएक्शन था?

रितेश पाल : मेरे माता-पिता फिनाले में मौजूद थे। मेरी मां ने मुझे गले लगाया और रोने लगीं। मैं खुद बिल्कुल ब्लैंक हो गया था। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। मैंने सर से यहां तक पूछा, “क्या हमने सच में जीत लिया? क्या हम सच में यह कैप घर लेकर जा रहे हैं? क्या हमें सच में कार की चाबी मिल गई है?” मुझे यह समझने में थोड़ा समय लगा कि हम वास्तव में जीत चुके हैं।

आपने एक कार भी जीती है। क्या आपने उसे चलाया?

रितेश पाल : मुझे अभी कार चलाना ही नहीं आता!

प्रतीक, क्या आप रितेश को इंटरनेशनल लेवल पर भारत को रिप्रेजेंट करते हुए देखते हैं?

प्रतीक उतेकर : बिल्कुल। मुझे लगता है कि उसमें इंटरनेशनल लेवल पर भारत को रिप्रेजेंट करने की बहुत क्षमता है। अगला कदम निश्चित रूप से इंटरनेशनल हो सकता है। सही गाइडेंस और अवसर मिलने पर मेरा मानना है कि वह भारतीय डांस को ग्लोबल प्लेटफॉर्म तक ले जा सकता है।

रितेश, छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे ?

रितेश पाल : मैं यही कहना चाहूंगा कि कोई भी जगह छोटी नहीं होती। हम सभी भारतीय हैं और हमें अपने टैलेंट पर विश्वास रखना चाहिए। छत्तीसगढ़ एक बहुत खूबसूरत जगह है। मैंने अभी तक पूरे राज्य को एक्सप्लोर नहीं किया है। यहां बहुत सारी छिपी हुई जगहें, झरने और प्राकृतिक स्थान हैं, जिन्हें मैं अभी देखना चाहता हूं। मैं धमतरी जा चुका हूं, लेकिन अभी जगदलपुर और दूसरी प्राकृतिक जगहों को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। मुझे झरने बहुत पसंद हैं, इसलिए मैं छत्तीसगढ़ को और ज्यादा एक्सप्लोर करना चाहता हूं। मैं अपने राज्य और उसकी संस्कृति के बारे में भी और जानना चाहता हूं।

आखिर में, आप उभरते हुए डांसर्स से क्या कहना चाहेंगे ?

प्रतीक उतेकर : अगर आपके अंदर डांस के लिए जुनून है, तो उस जुनून को हमेशा जिंदा रखिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस शहर से आते हैं। भारत में बहुत ज्यादा टैलेंट है। अगर आपके अंदर का वह जुनून खत्म हो गया, तो आप उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाएंगे, जहां आप पहुंचना चाहते हैं। और जब आप उस ऊंचाई तक पहुंच भी जाएं, तब भी उस जुनून को खत्म मत होने दीजिए। सफलता की कोई सीमा नहीं होती। सीखते रहिए, मेहनत करते रहिए और डांस करते रहिए।

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