अंजलि अरोड़ा : सोशल मीडिया से ‘सीता’ तक का सफर, ट्रोलिंग और जिंदगी से सीखे सबक

सोशल मीडिया पर रील्स के जरिए लोकप्रिय हुईं अंजलि अरोड़ा अब श्री महाकाव्य रामायण कथा में सीता की भूमिका निभाते हुए अपने अभिनय करियर की नई शुरुआत कर रही हैं। अंजलि ने अपने सफर में काफी ट्रोलिंग का सामना किया है, लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने ट्रोल्स की बातों पर ध्यान देना छोड़ दिया है। अभिषेक सिंह द्वारा निर्देशित महाकाव्य श्री रामायण कथा 25 सितंबर को रिलीज होने जा रही है।अंजलि ने रियलिटी शो में अपने अनुभव और शो की होस्ट कंगना रनौत के साथ हुई बातचीत को लेकर भी खुलकर बात की। प्रस्तुत हैं अंजलि अरोड़ा के इंटरव्यू के प्रमुख अंश -
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अंजलि अरोड़ा
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अंजलि, आप काफी समय से लोगों की नजरों में हैं और सोशल मीडिया पर अक्सर ट्रोलिंग का सामना भी करती हैं। आप इसे कैसे संभालती हैं, खासकर जब महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा ट्रोल किया जाता है?

मेरा मानना है कि ट्रोल्स की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमेशा कुछ ऐसे लोग होंगे, जिन्हें कुछ न कुछ कहना होगा, लेकिन मैंने समय के साथ यह सीख लिया है कि उनकी राय को खुद पर हावी नहीं होने देना है। मैं सवालों और आलोचनाओं का जवाब भी मुस्कुराकर देने की कोशिश करती हूं, क्योंकि मैं खुद को इसी तरह पेश करना चाहती हूं। वक्त के साथ मैंने समझा है कि हर बात पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं होता।

सोशल मीडिया ने मुझे लोगों से जुड़ने और अपनी पहचान बनाने का मौका दिया। अब एक अभिनेत्री के तौर पर मैं अलग-अलग किरदारों को एक्सप्लोर करना चाहती हूं और अपने व्यक्तित्व का एक अलग पहलू लोगों के सामने लाना चाहती हूं।

आपने अपने करियर की शुरुआत सोशल मीडिया पर्सनैलिटी के तौर पर की और अपने वायरल कंटेंट से लोकप्रिय हुईं। आज आप एक पौराणिक प्रोजेक्ट महाकाव्य रामायण कथा में कदम रख रही हैं। इस बदलाव को आप किस तरह देखती हैं ?

मुझे लगता है कि एक इन्फ्लुएंसर होना भी एक तरह का टैलेंट है। सोशल मीडिया ने मुझे लोगों से जुड़ने और अपनी पहचान बनाने का मौका दिया। अब एक अभिनेत्री के तौर पर मैं अलग-अलग किरदारों को एक्सप्लोर करना चाहती हूं और अपने व्यक्तित्व का एक अलग पहलू लोगों के सामने लाना चाहती हूं। श्री रामायण कथा मेरे लिए बिल्कुल अलग अनुभव है और सीता मां का किरदार निभाना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मैं इसे अपने अभिनय सफर की एक नई शुरुआत के रूप में देखती हूं।

मेरे लिए सीता शक्ति का प्रतीक हैं

सीता आपके लिए व्यक्तिगत रूप से क्या मायने रखती हैं ?

मेरे लिए सीता शक्ति का प्रतीक हैं। वह बेहद सौम्य, करुणामयी और मजबूत थीं, बावजूद इसके कि उन्हें जीवन में बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्हें निभाते हुए मुझे एहसास हुआ कि ताकत हमेशा जोर से दिखाई देने वाली चीज नहीं होती। कभी-कभी धैर्य, गरिमा और अपने मूल्यों पर कायम रहना भी ताकत होती है।

व्यक्तिगत तौर पर मुझे सादगी पसंद है

आप अपने मॉडर्न सोशल मीडिया इमेज के लिए जानी जाती हैं। अचानक सीता मां के सरल और पारंपरिक रूप में आना आपके लिए कैसा अनुभव रहा ?

ईमानदारी से कहूं तो सादगी मेरी निजी जिंदगी का भी हिस्सा है। मुझे साधारण कपड़े पहनना पसंद है। बेशक, जब आप इस इंडस्ट्री में होते हैं तो आपके आसपास बहुत सारा ग्लैमर और रंग होता है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मुझे सादगी पसंद है। जब मैंने सीता मां के लिए साड़ी और पारंपरिक लुक अपनाया, तो मुझे लगा कि यह उनके व्यक्तित्व को बहुत खूबसूरती से दर्शाता है। मुझे यह लुक खुद पर भी अच्छा लगा, इसलिए इसे निभाना मेरे लिए काफी स्वाभाविक रहा।

उस अनुभव ने मुझे एक बहुत महत्वपूर्ण सीख दी-कभी भी किसी को अपना फायदा नहीं उठाने देना चाहिए। मैंने यह भी समझा कि हर इंसान अलग होता है। हर किसी का व्यक्तित्व, व्यवहार और सोचने का तरीका अलग होता है।

आपने आज काफी आत्मविश्वास से बात की। एक व्यक्ति के तौर पर आपकी सबसे बड़ी ताकत क्या है और आपको कब महसूस हुआ कि आप पहले से ज्यादा मैच्योर हो गई हैं?

जब मैं 2021 में एक रियलिटी शो में गई थी, तब मैं बहुत छोटी और अपरिपक्व थी। उस समय मुझे हमेशा यह समझ नहीं आता था कि किसी परिस्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी है या मेरे लिए क्या सही और क्या गलत है। उस अनुभव ने मुझे एक बहुत महत्वपूर्ण सीख दी-कभी भी किसी को अपना फायदा नहीं उठाने देना चाहिए। मैंने यह भी समझा कि हर इंसान अलग होता है। हर किसी का व्यक्तित्व, व्यवहार और सोचने का तरीका अलग होता है। कई बार हमें लगता है कि सामने वाला गलत है, लेकिन हो सकता है कि वह उसी परिस्थिति को अलग नजरिए से देख रहा हो। समय के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मैंने लोगों को बेहतर तरीके से समझना सीखा।

जब आप चुप रहते हैं तो लोग आपकी खामोशी का गलत मतलब निकाल सकते हैं और यह मान सकते हैं कि शायद गलती आपकी है।

रियलिटी शो के अनुभव से आपको सबसे बड़ी सीख क्या मिली ?

मैंने सीखा कि अपनी राय सही समय पर व्यक्त करनी चाहिए और हमेशा चुप नहीं रहना चाहिए। जब आप चुप रहते हैं तो लोग आपकी खामोशी का गलत मतलब निकाल सकते हैं और यह मान सकते हैं कि शायद गलती आपकी है। पहले कहा जाता था कि खामोशी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन अब मुझे लगता है कि सही समय पर अपनी बात रखना भी उतना ही जरूरी है। जब आप अपने लिए स्टैंड नहीं ले सकते, तो हमेशा यह उम्मीद नहीं कर सकते कि कोई दूसरा आपके लिए खड़ा होगा।

मैं पूरे शो को स्क्रिप्टेड नहीं कह सकती

क्या रियलिटी शोज स्क्रिप्टेड होते हैं ?

मैं यह नहीं कहूंगी कि वे स्क्रिप्टेड होते हैं, क्योंकि मुझे पूरी तरह नहीं पता कि पर्दे के पीछे क्या होता है, लेकिन शो में जाने से पहले प्रतिभागियों को कई चीजें जरूर बताई जाती हैं। कुछ नियम और शर्तें होती हैं और कुछ चीजों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। इसलिए मैं यह कहूंगी कि कुछ निर्देश और शर्तें जरूर होती हैं, लेकिन मैं पूरे शो को स्क्रिप्टेड नहीं कह सकती।

मैंने कंगना को उनकी पहली फिल्म से ही पसंद किया है। लोगों की उनके बारे में अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन मेरा उनके साथ व्यक्तिगत अनुभव अच्छा रहा है।

आपने कंगना रनौत के बारे में सकारात्मक बातें की हैं। उनके साथ आपकी बातचीत कैसी रही ?

मैंने कंगना को उनकी पहली फिल्म से ही पसंद किया है। लोगों की उनके बारे में अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन मेरा उनके साथ व्यक्तिगत अनुभव अच्छा रहा है। जब मैं रियलिटी शो में गई थी, तब उन्होंने मुझसे कहा, आपके इतने सारे फॉलोअर्स हैं।” उस समय मैं चुप थी, क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूं। उन्होंने कहा कि वह इतने सालों से इंडस्ट्री में हैं, लेकिन उनके उतने फॉलोअर्स नहीं हैं और उन्होंने मुझसे पूछा कि मुझमें ऐसा क्या खास है। मैंने उनसे कहा, “मेरी जर्नी के दौरान आपको पता चल जाएगा।”

उस अनुभव ने मुझे एक महत्वपूर्ण बात सिखाई-आपको पता होना चाहिए कि सही जवाब कब और किस तरह देना है। आपके व्यक्तित्व को आसानी से गलत समझा जा सकता है, इसलिए बातचीत और संवाद बहुत महत्वपूर्ण हैं।

व्यावहारिक अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक होता है

आपको परिस्थितियों को इतनी शांति से संभालना और इतनी सहजता से जवाब देना किसने सिखाया ?

मुझे किसी ने खास तौर पर नहीं सिखाया। व्यावहारिक अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक होता है। जैसे-जैसे हम जिंदगी में आगे बढ़ते हैं, हम अलग-अलग लोगों और अलग-अलग व्यक्तित्वों से मिलते हैं और नई चुनौतियों का सामना करते हैं। धीरे-धीरे हम सीखते हैं। मैंने अभी जिंदगी में सब कुछ अनुभव नहीं किया है और मुझे अभी भी बहुत कुछ सीखना है। सीखना कभी खत्म नहीं होता।

सीता ने अपने पूरे जीवन में बहुत कुछ त्याग किया। उन्होंने पत्नी, बहू और बेटी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और बेहद कठिन परिस्थितियों का भी गरिमा के साथ सामना किया।

आपने सीता के त्याग से क्या सीखा ?

सीता ने अपने पूरे जीवन में बहुत कुछ त्याग किया। उन्होंने पत्नी, बहू और बेटी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और बेहद कठिन परिस्थितियों का भी गरिमा के साथ सामना किया। मुझे उनकी सबसे खास बात यह लगती है कि उन्होंने चुनौतियों का सामना जिस तरह किया। उन्होंने मुश्किलों को अपनी गरिमा कम नहीं करने दी। मेरे लिए यह उनकी बहुत शक्तिशाली खूबी है। राम और सीता का रिश्ता भी बहुत गहरा था। उनका संबंध प्रेम, विश्वास और समझ पर आधारित था। सीता का किरदार निभाते हुए मैंने इस बात को और भी गहराई से महसूस किया है।

अगर किसी रिश्ते में आपसी सम्मान और विश्वास है, तो वह रिश्ता लंबे समय तक मजबूत रह सकता है।

आप अपने होने वाले पति में किन खूबियों को देखना चाहेंगी ?

सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण चीज होगी सम्मान। मुझे लगता है कि किसी भी रिश्ते में सम्मान बेहद जरूरी है। प्यार समय के साथ बदल सकता है, लेकिन सम्मान जीवनभर कायम रह सकता है। अगर किसी रिश्ते में आपसी सम्मान और विश्वास है, तो वह रिश्ता लंबे समय तक मजबूत रह सकता है। विश्वास और सम्मान के बिना किसी भी रिश्ते को निभाना मुश्किल हो जाता है।

दर्शक हमेशा तुलना करेंगे और यह उनका अधिकार है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी व्याख्या को पूरी ईमानदारी के साथ पेश करें।

आपकी तुलना दीपिका से की जाएगी, जिन्होंने पहले सीता का किरदार निभाया है। आप इस तुलना को किस तरह लेंगी ?

हम सभी उन कलाकारों को देखकर और उनका सम्मान करते हुए बड़े हुए हैं, जिन्होंने हमसे पहले इन किरदारों को निभाया है। उन्होंने लोगों के दिलों में एक बहुत खास जगह बनाई है। हम बस अपने किरदारों को ईमानदारी से निभाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर दर्शक अभी भी तुलना करते हैं, तो शायद इसका मतलब है कि हमारी प्रस्तुति ने उन्हें इतना उत्सुक किया है कि वे तुलना कर रहे हैं। दर्शक हमेशा तुलना करेंगे और यह उनका अधिकार है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी व्याख्या को पूरी ईमानदारी के साथ पेश करें।

यह अभी शुरुआत है, इसलिए मैं देखना चाहती हूं कि यह सफर मुझे कहां लेकर जाता है। मैं खुद पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाना चाहती।

सोशल मीडिया से पौराणिक किरदार तक के अपने सफर को देखते हुए, क्या आप भविष्य में और भी पौराणिक किरदार निभाना चाहेंगी ?

बिल्कुल। मैं अलग-अलग व्यक्तित्वों और किरदारों को एक्सप्लोर करना चाहती हूं और नए अवसरों को अपनाना चाहती हूं। यह अभी शुरुआत है, इसलिए मैं देखना चाहती हूं कि यह सफर मुझे कहां लेकर जाता है। मैं खुद पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाना चाहती। अगर मुझे भगवान कृष्ण से जुड़े किसी किरदार को निभाने का मौका मिलता है, तो मैं राधा के किरदार और कृष्ण से जुड़ी उस मिठास को जरूर एक्सप्लोर करना चाहूंगी। अगर भगवान शिव से जुड़ा कोई अवसर मिलता है, तो उसे भी निभाना चाहूंगी। इसके साथ ही मैं अलग-अलग जॉनर और तरह-तरह के किरदारों के साथ प्रयोग करना चाहती हूं।

आज की जेनरेशन कभी-कभी बहुत जल्दबाजी में फैसले लेती है, क्योंकि हर कोई चीजें जल्दी हासिल करना चाहता है। चाहे वह एक्टिंग हो, ऑफिस की नौकरी हो या बिजनेस-आपकी नीयत और आपका नजरिया बहुत मायने रखता है।

आज की जेनरेशन, खासकर युवा लड़कियों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी ?

मैं बस यही कहना चाहूंगी कि अपनी जिंदगी से जुड़े फैसलों को लेकर धैर्य रखें। ऐसा महसूस न करें कि हर चीज तुरंत होनी चाहिए। आज की जेनरेशन कभी-कभी बहुत जल्दबाजी में फैसले लेती है, क्योंकि हर कोई चीजें जल्दी हासिल करना चाहता है। चाहे वह एक्टिंग हो, ऑफिस की नौकरी हो या बिजनेस-आपकी नीयत और आपका नजरिया बहुत मायने रखता है। अगर आप सही नीयत और सही सोच के साथ कोई काम करते हैं, तो आप उस सफर से जरूर सीखेंगे और आगे बढ़ेंगे। इसलिए हर चीज में जल्दबाजी न करें। खुद को समय दें। -लिपिका वर्मा

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