प्यार को इस तरह खराब मत कीजिए : काजल

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काजल चौहान
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सबसे पहले ' दिल दीवाना हो गया' के लिए बधाई । फिल्म के बारे में कुछ बताइए। दर्शकों को इसमें क्या देखने को मिलेगा ?

बहुत-बहुत धन्यवाद। हमारी फिल्म का नाम ही सब कुछ कह देता है-'दिल दीवाना हो गया'। यह फिल्म प्यार की खूबसूरती को समझाने की कोशिश करती है। आजकल लोग प्यार का मतलब बदलते जा रहे हैं, जबकि प्यार दुनिया की सबसे खूबसूरत भावनाओं में से एक है। हमारी फिल्म यही संदेश देती है कि सच्चे प्यार को समझिए और उसकी कद्र कीजिए। यह फिल्म -31 जुलाईको सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है और मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे ज़रूर पसंद करेंगे।

मैं हमेशा यही कहती हूं कि अपनी ज़िंदगी में अच्छे लोगों का साथ रखिए, क्योंकि एक गलत इंसान भी आपकी पूरी ज़िंदगी और करियर को प्रभावित कर सकता है।

आपकी एक्टिंग जर्नी कैसे शुरू हुई ?

करीब आठ साल पहले मैं सिर्फ एक सपना लेकर मुंबई आई थी-एक्टर बनने का सपना। मेरी मां और पूरे परिवार ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। संघर्ष आसान नहीं था, लेकिन मेरे परिवार ने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। मैं हमेशा यही कहती हूं कि अपनी ज़िंदगी में अच्छे लोगों का साथ रखिए, क्योंकि एक गलत इंसान भी आपकी पूरी ज़िंदगी और करियर को प्रभावित कर सकता है।

पहले माना जाता था कि टेलीविज़न कलाकारों को फिल्मों में स्वीकार नहीं किया जाता, लेकिन अब समय बदल चुका है। आज दर्शक सिर्फ प्रतिभा देखते हैं।
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काजल चौहान

कई लोग आपके फिल्मी सफर की तुलना शाहरुख खान के शुरुआती सफर से कर रहे हैं। इस पर आपका क्या कहना है ? वो भी टी वी से बड़े पर्दे पर पहुंच गए ?

यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। शाहरुख सर से तुलना होना किसी भी कलाकार के लिए गर्व की बात है। मैं बस इतना चाहती हूं कि मेहनत करते-करते मैं भी एक दिन उस मुकाम तक पहुंच सकूं। पहले माना जाता था कि टेलीविज़न कलाकारों को फिल्मों में स्वीकार नहीं किया जाता, लेकिन अब समय बदल चुका है। आज दर्शक सिर्फ प्रतिभा देखते हैं।

क्या टेलीविज़न कलाकारों के लिए फिल्मों में जगह बनाना मुश्किल होता है?

पहले जरूर थोड़ा मुश्किल था क्योंकि लोग टीवी कलाकारों को उनके किरदारों से जोड़कर देखते थे, लेकिन आज दर्शकों की सोच बदल रही है। अगर आपके अंदर प्रतिभा है और आप मेहनत करते हैं, तो आपको मौके जरूर मिलते हैं।

आज लोगों के पास इतने विकल्प हैं कि रिश्तों को निभाने के बजाय वे आसानी से आगे बढ़ जाते हैं।

आप खुद को जेन-ज़ी मानती हैं या 90 के दशक की सोच वाली ?

उम्र से मैं जेन-ज़ी हूं, लेकिन मेरी सोच 90 के दशक जैसी है। मुझे अपने माता-पिता का अच्छे रिश्ते रखना पसंद करती हूं ।आज लोगों के पास इतने विकल्प हैं कि रिश्तों को निभाने के बजाय वे आसानी से आगे बढ़ जाते हैं। मैं आज भी सच्चे प्यार, भरोसे और कमिटमेंट में विश्वास रखती हूं।

आजकल के रिलेशनशिप ट्रेंड्स जैसे सिचुएशनशिप, बेंचिंग और डबल डेटिंग पर आपकी क्या राय है ?

मैं इन सब चीज़ों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करती। प्यार को इस तरह खराब मत कीजिए। मुझे समझ नहीं आता कि लोग सिचुएशनशिप, बेंचिंग या टू-टाइमिंग जैसी चीज़ों को कैसे स्वीकार कर लेते हैं। मेरे लिए प्यार का मतलब ईमानदारी, सम्मान और पूरी निष्ठा है। -लिपिका वर्मा

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