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स्टॉक एक्सचेंजों की सेल्फ-लिस्टिंग के नियमों की समीक्षा करेगा सेबी, जल्द बनेगी उच्चस्तरीय समिति
नई दिल्ली :
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) स्टॉक एक्सचेंजों की खुद अपने ही मंच पर लिस्टिंग यानी सेल्फ-लिस्टिंग से जुड़े नियमों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक समिति में बाजार विशेषज्ञों के साथ सेबी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। समिति को 60 से 90 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें देने की संभावना है। इसके आधार पर सेबी सेल्फ-लिस्टिंग के प्रस्तावित ढांचे पर परामर्श पत्र जारी कर सकता है।सेल्फ-लिस्टिंग में सबसे अहम मुद्दा हितों के टकराव और नियामकीय निगरानी का है। विचाराधीन प्रस्ताव के अनुसार, किसी एक्सचेंज की खुद लिस्टिंग होने के बाद भी प्राथमिक नियामकीय निगरानी की जिम्मेदारी मौजूदा नियामक के पास बनाए रखने का विकल्प देखा जा रहा है। इससे उस स्थिति में संभावित हितों के टकराव को दूर करने में मदद मिल सकती है, जब कोई एक्सचेंज एक साथ सूचीबद्ध कंपनी और बाजार संचालक की भूमिका निभाए।यह घटनाक्रम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के हालिया आईपीओ के बाद आया है। एनएसई के 22,568.94 करोड़ रुपये के आईपीओ की मजबूत मांग के बाद उसके शेयर 24 सितंबर को बीएसई पर 1,800 रुपये प्रति शेयर के भाव पर सूचीबद्ध हुए थे, जबकि इश्यू मूल्य 1,785 रुपये था।एनएसई के चेयरमैन श्रीनिवास इंजेटी ने हाल में मौजूदा सेल्फ-लिस्टिंग नियमों पर पुनर्विचार की जरूरत बताई थी। उनका कहना था कि भारतीय पूंजी बाजार काफी परिपक्व हो चुका है और दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में एक्सचेंजों को अपनी ही लिस्टिंग की अनुमति है।मौजूदा व्यवस्था में एनएसई के शेयर बीएसई पर सूचीबद्ध हैं। यदि भविष्य में एनएसई को अपने ही मंच पर लिस्टिंग की अनुमति मिलती है, तो नियामकीय निगरानी, कॉरपोरेट गवर्नेंस और हितों के टकराव से जुड़े सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण होंगे। दुनिया में नैस्डैक और एनवाईएसई की मूल कंपनी इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज के अपने-अपने एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होने के उदाहरण भी मौजूद हैं।सेल्फ-लिस्टिंग की खबरों के बीच सोमवार को बीएसई लिमिटेड के शेयर पर दबाव रहा। बीएसई का शेयर एनएसई पर एक समय 2.4% गिरकर 3,112.10 रुपये तक पहुंच गया।

