

मेरिकी डॉलर में कमजोरी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा बाजार में संरचनात्मक हस्तक्षेपों के सकारात्मक प्रभाव से शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 20 पैसे मजबूत होकर 94.79 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट से भी रुपये को समर्थन मिला।
हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के कारण रुपये की तेजी सीमित रही।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.75 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 94.79 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 94.99 पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि डॉलर इंडेक्स में गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी से रुपये को मजबूती मिली।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये की तेजी पर अंकुश लगाया।
अमेरिका से जारी आर्थिक आंकड़ों में उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) उम्मीद से अधिक रहा, जबकि खुदरा बिक्री के आंकड़े अनुमान से बेहतर रहे। साप्ताहिक बेरोजगारी दावों के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे।
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.54% गिरकर 102 पर कारोबार कर रहा था।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.54% गिरकर 105.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। महंगा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है और डॉलर की मांग में इजाफा कर रुपये पर दबाव डाल सकता है।
रुपये में मजबूती के बावजूद घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली।
सेंसेक्स: 113 अंक गिरकर 74,187 पर पहुंचा।
निफ्टी: 27.20 अंक गिरकर 22,967.15 पर रहा।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध आधार पर 5,285.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है और इससे रुपये की तेजी भी सीमित हो सकती है।
रुपये की चाल मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करेगी:
डॉलर इंडेक्स: डॉलर में कमजोरी जारी रहने से रुपये को समर्थन मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें: तेल महंगा रहने पर भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों का रुख: FII की लगातार बिकवाली डॉलर की मांग बढ़ा सकती है और घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकती है।
कुल मिलाकर, शुक्रवार को डॉलर में कमजोरी और RBI के हस्तक्षेपों से रुपये को राहत मिली, लेकिन महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मुद्रा बाजार के लिए प्रमुख चुनौतियां बने हुए हैं।