युद्ध से रुपये पर दबाव-महंगाई का जोखिम बढ़ा

जोखिम इस क्षेत्र से कच्चे तेल और एलएनजी आयात पर भारत की भारी निर्भरता के कारण है
इंटरनेट
मूडीज रेटिंग्स Moody's
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नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया संघर्ष से ऊर्जा की कीमतों में और उछाल आया तो भारत को रुपये पर दबाव, उच्च मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे (सीएडी) में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि यह जोखिम इस क्षेत्र से कच्चे तेल और एलएनजी आयात पर भारत की भारी निर्भरता के कारण है।

पश्चिम एशिया पर निर्भर : बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में भारत उन देशों में प्रमुख है, जो कच्चे तेल और एलएनजी के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जो इस क्षेत्र से कच्चे तेल और एलएनजी निर्यात के लिए एक प्रमुख मार्ग है। महंगे ऊर्जा आयात से रुपया कमजोर होगा, महंगाई बढ़ेगी, चालू खाता संतुलन बिगड़ेगा और मौद्रिक नीति के साथ ही राजकोषीय प्रबंधन भी जटिल हो जाएगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा : पश्चिम एशिया संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। हालांकि बुनियादी ढांचे को अभी तक महत्वपूर्ण नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जलडमरूमध्य के माध्यम से पोत परिवहन काफी हद तक रुक गया है और कुछ क्षेत्रीय बंदरगाहों ने परिचालन निलंबित कर दिया है।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें : एजेंसी ने चेतावनी दी कि यदि यह व्यवधान कुछ हफ्तों से अधिक समय तक बना रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

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