भारत की दवा कंपनियों को प्रोत्साहन देगा उज्बेकिस्तान

सब्सिडी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और आसान लाइसेंसिंग के जरिये उज्बेकिस्तान भारतीय दवा कंपनियों को स्थानीय उत्पादन के लिए आकर्षित करेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और फार्मा आपूर्ति केंद्र के रूप में उसकी भूमिका मजबूत होगी
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नयी दिल्ली : भारतीय दवा कंपनियों से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए उज्बेकिस्तान ने सब्सिडी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) प्रोत्साहन और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने की पेशकश की है। उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग और व्यापार उपमंत्री शौखरुख गुलामोव ने कहा कि स्थानीय दवा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए नियामकीय मंजूरियों को आसान बनाना और निवेश प्रोत्साहन को मजबूत करना आवश्यक है। लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने, नौकरशाही की बाधाओं को कम करने और नियामकीय समयसीमा को स्पष्ट व अनुमान लगाने योग्य बनाने से स्थानीय उत्पादन अधिक आकर्षक होगा। बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा और दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता उच्च मूल्य वाले फार्मा निवेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

क्या होगा लाभ : स्थानीय उत्पादन को क्षेत्रीय वितरण नेटवर्क और निर्यात कार्यक्रमों से जोड़ने से लाभप्रदता बढ़ेगी तथा आयात पर निर्भरता कम होगी। इन सुधारों से भारतीय कंपनियों को आवश्यक दवाओं का स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने में मदद मिलेगी, जिससे उज्बेकिस्तान में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी और देश की क्षेत्रीय फार्मास्युटिकल आपूर्ति केंद्र के रूप में भूमिका भी मजबूत होगी।

व्यापारिक साझेदारी : उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 33.3 प्रतिशत बढ़कर 1.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसमें निर्यात 25.4 प्रतिशत बढ़कर 16.46 करोड़ डॉलर और आयात 34.6 प्रतिशत बढ़कर 1.15 अरब डॉलर रहा। वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार 30 करोड़ डॉलर रहा, जो मौसमी उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूत गति को दर्शाता है। दोनों देशों के बीच अब तक 117 द्विपक्षीय समझौते हो चुके हैं, जिनमें 2011 की रणनीतिक साझेदारी घोषणा और सितंबर, 2024 में हुआ निवेश संरक्षण समझौता शामिल है।

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