ट्रांसफर प्राइसिंग विवाद विकासशील देशों पर अधिक बोझ डालते हैं : सीतारमण

अगले कुछ वर्षों में इन प्रक्रियाओं के तहत लिए जाने वाले फैसले एक पीढ़ी तक सीमा-पार कराधान को प्रभावित कर सकते हैं।
ट्रांसफर प्राइसिंग विवाद विकासशील देशों पर अधिक बोझ डालते हैं : सीतारमण
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नयी दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कंपनियों और उनकी अनुषंगी इकाइयों के बीच लेनदेन से जुड़े ‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ विवाद विकासशील देशों के प्रशासन पर असमान रूप से अधिक बोझ डालते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कराधान और राजस्व सांख्यिकी पर ब्रिक्स के दो नए कार्य समूह गठित करने की जरूरत बताई।

ब्रिक्स देशों के कर प्रमुखों और विशेषज्ञों की बैठक को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि बैठक में इन दोनों प्रस्तावित कार्य समूहों के कार्यक्षेत्र से जुड़े दस्तावेजों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे राजस्व ढांचे, जो देशों की राजकोषीय वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं होते, उनकी स्थिति और आर्थिक समझ को विकृत कर सकते हैं।

सीतारमण के मुताबिक, नए कार्य समूहों का उद्देश्य प्रगति के लिए स्थायी संस्थागत व्यवस्था बनाना है, जो ब्रिक्स की अध्यक्षता बदलने के बाद भी जारी रहेगी। चीन 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कर नियमों पर कई बहुपक्षीय मंचों पर फिर से बातचीत हो रही है। इनमें अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय भी शामिल है। उनके अनुसार, अगले कुछ वर्षों में इन प्रक्रियाओं के तहत लिए जाने वाले फैसले एक पीढ़ी तक सीमा-पार कराधान को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की इन वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इनमें बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएं और कर के स्रोत वाले क्षेत्राधिकार शामिल हैं। ऐसे देशों ने सीमित आधार से अपनी घरेलू कर क्षमता विकसित की है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कर नियमों पर चर्चा में ब्रिक्स का दृष्टिकोण निष्पक्षता और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए अहम है।

सीतारमण ने इस वर्ष ब्रिक्स के कराधान संबंधी काम के प्रमुख परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर प्रशासन को अधिक सटीक बनाने और अधिकारियों के विवेकाधिकार को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। साझा प्रशासनिक मानकों और लोगों, खासकर युवाओं में निवेश को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि कर विशेषज्ञों ने दो दिन तक प्रस्तावित कार्य समूहों के दायरे की समीक्षा की। अंतरराष्ट्रीय कराधान एवं ट्रांसफर प्राइसिंग समूह कर संधियों की व्याख्या, जांच, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (एपीए), पारस्परिक समझौता प्रक्रिया (एमएपी) और संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय जैसे विषयों पर अनुभव साझा करने के लिए स्थायी मंच तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय वार्ताओं में ब्रिक्स देशों की सामूहिक आवाज को मजबूत करने की जरूरत है।

श्रीवास्तव के अनुसार, राजस्व सांख्यिकी कार्य समूह ऐसा ढांचा विकसित करेगा, जो ब्रिक्स देशों की राजकोषीय वास्तविकताओं को दर्शाए, न कि अलग तरह की अर्थव्यवस्थाओं के लिए बनाए गए मानकों की धारणाओं को अपनाए।

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