BRICS की आर्थिक ताकत का केंद्र चीन, भारत और रूस, तीनों के व्यापारिक रिश्ते तय करेंगे दिशा

रूसी ऊर्जा, चीनी मशीनरी और भारतीय बाजार पर टिका त्रिकोणीय व्यापार BRICS की दिशा तय कर रहा, पर स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन और संतुलित व्यापार लक्ष्य राह को जटिल बना रहे हैं
PPP के आधार पर चीन 44.3 लाख करोड़, भारत 18.9 लाख करोड़ और रूस 7.5 लाख करोड़ डॉलर पर हैं
BRICS की आर्थिक ताकत का केंद्र चीन, भारत और रूस, तीनों के व्यापारिक रिश्ते तय करेंगे दिशा
Published on

नई दिल्ली : BRICS के विस्तार के साथ यह समूह अब 11 सदस्य देशों का बड़ा आर्थिक और कूटनीतिक मंच बन चुका है। बहुध्रुवीय वैश्विक अर्थव्यवस्था की चर्चा में इसकी भूमिका बढ़ रही है, लेकिन समूह की आर्थिक ताकत का बड़ा हिस्सा चीन, भारत और रूस के पास केंद्रित है। तीनों देशों की संयुक्त हिस्सेदारी BRICS के कुल नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 80 प्रतिशत से अधिक और क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर करीब 78 प्रतिशत है।

BRICS की कुल नाममात्र GDP 35 लाख करोड़ डॉलर से अधिक

BRICS की कुल नाममात्र GDP 35 लाख करोड़ डॉलर से अधिक और PPP के आधार पर 90 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा है। चीन करीब 20.9 लाख करोड़ डॉलर की नाममात्र GDP के साथ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत की GDP करीब 4.2 लाख करोड़ डॉलर और रूस की करीब 2.7 लाख करोड़ डॉलर है। PPP के आधार पर चीन 44.3 लाख करोड़, भारत 18.9 लाख करोड़ और रूस 7.5 लाख करोड़ डॉलर पर हैं।

डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार भी बढ़ाया

इन तीनों के बीच चीन-रूस, चीन-भारत और भारत-रूस व्यापार मार्ग BRICS की आर्थिक दिशा को प्रभावित कर रहे हैं। चीन और रूस के बीच व्यापार मुख्य रूप से रूसी तेल, गैस, एलएनजी और खनिजों के बदले चीनी मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहनों पर आधारित है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद चीन रूसी ऊर्जा का बड़ा बाजार बन गया है। दोनों देशों ने डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार भी बढ़ाया है।

स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश भी तेज

भारत और चीन के बीच व्यापार बड़ा है, लेकिन संतुलन चीन के पक्ष में है। भारतीय उद्योग चीनी मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, एपीआई, सौर उपकरण और अन्य औद्योगिक सामान पर काफी निर्भर हैं। इससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ता है।

वहीं, भारत-रूस व्यापार में 2022 के बाद रूसी कच्चे तेल की खरीद ने बड़ा बदलाव किया है। भारत को रियायती रूसी तेल से फायदा हुआ, लेकिन इसके कारण रूस से आयात भारत के निर्यात की तुलना में काफी तेज बढ़ा है। दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य रखा है।

BRICS में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश भी तेज हुई है। हालांकि, अलग-अलग मुद्राओं की तरलता, भुगतान व्यवस्था, वित्तीय नियमों और व्यापार असंतुलन के कारण इसे बड़े स्तर पर लागू करना आसान नहीं है। इसलिए BRICS की आर्थिक एकजुटता की राह में अवसरों के साथ कई व्यावहारिक चुनौतियां भी बनी हुई हैं।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in