

नयी दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने रुपये के लिए किसी भी स्तर का लक्ष्य नहीं बनाया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले घरेलू मुद्रा में हाल में आई गिरावट की वजह से डॉलर की मांग में तेजी है।केंद्रीय बैंक के पास विदेशी मुद्रा का ‘काफी अच्छा’ भंडार है। बाह्य क्षेत्र को लेकर चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है।
दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स में वीकेआरवी राव स्मृति व्याख्यान में मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रणाली में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। केंद्रीय बैंक जहां तक संभव हो, आवश्यक सुरक्षा उपायों एवं सुरक्षा-व्यवस्था को बनाए रखते हुए विनियमनों को सरल बनाने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत, अमेरिका के साथ एक ‘‘अच्छा व्यापार समझौता’’ करेगा और इससे देश के चालू खाता शेष पर दबाव कम होगा। मल्होत्रा ने कहा, हम किसी स्तर को लक्ष्य नहीं बनाते। रुपये में गिरावट क्यों आ रही है? ऐसा मांग के कारण है...। डॉलर की मांग है और यदि डॉलर की मांग बढ़ती है तो रुपये में गिरावट आती है। यदि रुपये की मांग बढ़ती है तो डॉलर में गिरावट आती है और रुपया मजबूत होता है।
वैश्विक बैंक बनेंगे कई भारतीय बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आर्थिक विस्तार और बैंकिंग प्रणाली में वृद्धि की गति को देखते हुए, भारत के और भी घरेलू बैंक जल्द ही दुनिया के शीर्ष 100 बैंकों की सूची में शामिल होंगे। वर्तमान में, केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और HDFC बैंक ही दुनिया के शीर्ष 100 बैंकों में शामिल हैं। ये दोनों बैंक क्रमशः 43वें और 73वें स्थान पर हैं। इस महीने की शुरुआत में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि देश को बड़े और वैश्विक स्तर के बैंकों की जरूरत है और इस संबंध में रिजर्व बैंक और वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत जारी है।
यह मौजूदा बैंकों से नए बैंक बनाने से नहीं हो सकता... विलय भी एक रास्ता हो सकता है। सही मायने में आपको एक ऐसे परिवेश की जरूरत है जिसमें ज्यादा बैंक काम कर सकें और आगे बढ़ सकें। भारत में यह माहौल पहले से ही अच्छी तरह से स्थापित है, लेकिन मुझे और ज्यादा गतिशील होने की जरूरत है...।