जून 2027 तक आरबीआई तीन बार और बढ़ा सकता है ब्याज दर, फिर भी 7% विकास का अनुमान

यह दरों में धीरे-धीरे सख्ती लाने का दौर होगा, न कि एक साथ बड़ी बढ़ोतरी का।
जून 2027 तक आरबीआई तीन बार और बढ़ा सकता है ब्याज दर, फिर भी 7% विकास का अनुमान
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नई दिल्ली : गोल्डमैन सैक्स के मुख्य भारत अर्थशास्त्री संतनु सेनगुप्ता के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जून 2027 तक तीन बार और ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इससे कुल बढ़ोतरी 75 आधार अंक हो सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि कड़ी मौद्रिक नीति और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।

सेनगुप्ता के अनुसार, आरबीआई दिसंबर, फरवरी और फिर अप्रैल या जून में दरें बढ़ा सकता है। फरवरी की बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय बैंक आर्थिक हालात का आकलन करने के लिए कुछ समय रुक सकता है और उसके बाद अंतिम बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। उन्होंने कहा कि यह दरों में धीरे-धीरे सख्ती लाने का दौर होगा, न कि एक साथ बड़ी बढ़ोतरी का।

2027 में अल नीनो से महंगाई बढ़ने का खतरा

सेनगुप्ता ने चेतावनी दी कि अल नीनो का असर 2027 में आर्थिक विकास और महंगाई, दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। उनके मुताबिक, खरीफ की फसल पर इसका असर सीमित रह सकता है, लेकिन जलाशयों में घटता जलस्तर रबी की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। मौजूदा खाद्यान्न भंडार निकट भविष्य में कीमतों को काबू में रखने में मदद कर सकते हैं, लेकिन 2027 तक भंडार घटने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

कच्चा तेल सबसे बड़ा जोखिम

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत 85 से 95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहेगी। यदि कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर या उससे ऊपर बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर दबाव पड़ सकता है। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए महंगा कच्चा तेल चालू खाते और सरकारी वित्तीय गुंजाइश पर भी असर डाल सकता है।

निजी निवेश में सुधार के संकेत

सेनगुप्ता के अनुसार, महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। बिजली उत्पादन, रक्षा विनिर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निजी पूंजीगत निवेश सुधरने के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी और आयकर में कटौती जैसे उपायों से अब अतिरिक्त प्रोत्साहन की गुंजाइश सीमित है।

उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी निवेश पर बाहरी दबाव बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक पूंजी अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े अवसर तलाश रही है। इसके बावजूद, गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि भारत की आर्थिक वृद्धि करीब 7 प्रतिशत बनी रह सकती है।

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