ऑफर से मुकरने वाली 22 कंपनियों को दो साल तक आईआईटी की भर्ती प्रक्रिया से रखा जाएगा दूर

आईआईटी-गुवाहाटी में इस महीने हुई एआईपीसी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
ऑफर से मुकरने वाली 22 कंपनियों को दो साल तक आईआईटी की भर्ती प्रक्रिया से रखा जाएगा दूर
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नई दिल्ली : छात्रों को नौकरी के ऑफर देने के बाद उन्हें पूरा नहीं करने वाली 22 कंपनियों के खिलाफ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) ने कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (एआईपीसी) ने तय किया है कि इन कंपनियों को अगले दो वर्षों तक आईआईटी की कैंपस भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। यह फैसला 2026 में स्नातक होने वाले छात्रों को दिए गए ऑफर वापस लेने या पूरा नहीं करने के मामलों के बाद लिया गया है।

आईआईटी-गुवाहाटी में इस महीने हुई एआईपीसी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। समिति 30 सितंबर तक संबंधित कंपनियों को पत्र भेजकर उन्हें अगले दो वर्षों तक भर्ती के लिए आईआईटी प्लेसमेंट सिस्टम के साथ सहयोग नहीं करने की जानकारी देगी। समिति इस कार्रवाई के लिए ‘ब्लैकलिस्टिंग’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करेगी, बल्कि इसे ‘नॉन-कोऑपरेशन’ यानी असहयोग के रूप में बताएगी।

एआईपीसी के संयोजक और आईआईटी-गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस के अनुसार, 23 आईआईटी में 150 से अधिक ऑफर इस विवाद से प्रभावित हुए हैं। कुछ कंपनियों ने 10 से 15 तक ऑफर वापस लिए या उन्हें पूरा नहीं किया। हालांकि, संबंधित कंपनियों के नामों की पूरी सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, ओरेकल भी उन कंपनियों में शामिल है जिनके खिलाफ दो साल के असहयोग का फैसला लिया जा सकता है। कंपनी ने आईआईटी परिसरों में करीब 40 ऑफर दिए थे, जिन्हें बाद में पूरा नहीं किया गया। इस साल कंपनी ने अब तक आईआईटी से भर्ती के लिए संपर्क नहीं किया है। कई स्टार्टअप भी संभावित सूची में शामिल हैं।

कंपनियों के ऑफर पूरा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर तय की गई थी। एआईपीसी अलग-अलग आईआईटी से मामलों की अंतिम जानकारी मिलने के बाद प्रभावित ऑफरों और कंपनियों की सूची को अंतिम रूप देगी। जोस के मुताबिक, पिछले साल करीब 10-11 कंपनियों ने ऑफर पूरे नहीं किए थे, जबकि इस साल ऐसे मामलों की संख्या हाल के वर्षों में सबसे अधिक है।

प्रभावित छात्रों की मदद के लिए आईआईटी के प्लेसमेंट कार्यालयों ने उनके सीवी मौजूदा भर्ती कंपनियों को भेजे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे क्रॉस-रेफरल के जरिए करीब 20-30 प्रतिशत प्रभावित छात्रों को नौकरी मिल चुकी है। हालांकि, कितने छात्र अब भी नौकरी की तलाश में हैं, इसका पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि कुछ छात्रों ने कैंपस से बाहर या अपने व्यक्तिगत नेटवर्क के जरिए रोजगार हासिल किया हो सकता है।

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