

नई दिल्ली : केंद्र सरकार EPFO 3.0 सुधारों के तहत एक नई अंशदायी (Contributory) पेंशन योजना लाने की तैयारी कर रही है। इस योजना का उद्देश्य मौजूदा Employees' Pension Scheme (EPS) से बाहर रहने वाले करोड़ों लोगों तक पेंशन का दायरा बढ़ाना है।
प्रस्तावित योजना में संगठित और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर तथा अधिक वेतन पाने वाले ऐसे कर्मचारी शामिल हो सकेंगे, जो फिलहाल ईपीएस के दायरे में नहीं आते।
नई योजना Defined Contribution Model पर आधारित होगी। इसमें प्रत्येक सदस्य के नाम से अलग पेंशन खाता होगा, जिसमें जमा राशि को सरकारी प्रतिभूतियों जैसे दीर्घकालिक सुरक्षित निवेश विकल्पों में लगाया जाएगा। इस पर हर साल ब्याज जोड़ा जाएगा।
60 वर्ष की आयु पूरी होने पर जमा राशि को उस समय की एन्युटी और ब्याज दरों के आधार पर नियमित पेंशन में बदला जाएगा।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता Target Retirement Sum (TRS) होगी। सदस्य अपनी जरूरत के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन का लक्ष्य तय कर सकेंगे।
इसके आधार पर सिस्टम यह बताएगा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए कितनी राशि और कितनी अवधि तक जमा करनी होगी। सदस्य अपने रिटायरमेंट लक्ष्य में समय-समय पर बदलाव भी कर सकेंगे।
सदस्यों को एक पर्सनल डैशबोर्ड मिलेगा, जिसमें कुल योगदान, मौजूदा कॉर्पस और तय लक्ष्य तक पहुंचने की प्रगति रियल टाइम में दिखाई देगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना में केवल कर्मचारी और नियोक्ता ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्रोतों से भी योगदान की व्यवस्था हो सकती है। इनमें -
सरकार की सह-भागीदारी (कम आय वाले कर्मचारियों के लिए)
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एग्रीगेटर कंपनियां
CSR फंड
गैर-सरकारी संगठन (NGO)
अन्य दानदाता संस्थाएं
EPFO एक 'वन-टू-मैनी' प्रणाली पर भी काम कर रहा है, जिसके तहत एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को कई नियोक्ताओं या डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सकेगा।
इससे एक से अधिक कंपनियों या प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स अपने सभी पीएफ और पेंशन योगदान का रिकॉर्ड एक ही खाते में देख सकेंगे।