टाटा ट्रस्ट्स ने चैरिटी कमिश्नर के सामने दायर किए कैविएट, एसडीटीटी विवाद में बढ़ी तनातनी

उन्होंने जांच पूरी होने तक एसडीटीटी बोर्ड में किसी भी बदलाव पर रोक लगाने की भी मांग की है।
टाटा ट्रस्ट्स ने चैरिटी कमिश्नर के सामने दायर किए कैविएट, एसडीटीटी विवाद में बढ़ी तनातनी
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मुंबई : टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच चल रहे आंतरिक शासन विवाद के बीच ट्रस्ट्स ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष अपनी स्थिति सुरक्षित करने की कवायद तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) समेत छह टाटा ट्रस्ट्स की ओर से कैविएट दाखिल किए गए हैं।

इन कैविएट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चैरिटी कमिश्नर ट्रस्ट्स को प्रभावित करने वाला कोई आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष भी सुने। ये मामले महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 41D, 41E और 47 के तहत चल रही कार्यवाही से जुड़े हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब एसडीटीटी के ट्रस्टी और टाटा संस के बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर वेनु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट के प्रशासन और शासन व्यवस्था की तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने जांच पूरी होने तक एसडीटीटी बोर्ड में किसी भी बदलाव पर रोक लगाने की भी मांग की है।

विवाद के केंद्र में क्या है

श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर को शिकायत में ‘परपेचुअल ट्रस्टी’ की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने हालिया फैसलों को कथित तौर पर गंभीर गवर्नेंस चूक बताते हुए जांच की मांग की है।

16 सितंबर को पारित सर्कुलर रेजोल्यूशन नंबर 107 को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।

श्रीनिवासन का आरोप है कि इस प्रस्ताव के जरिए उनकी स्वतंत्र राय और मतदान अधिकार को सीमित करने की कोशिश हुई।

निर्णय लेने की शक्ति कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित होने का जोखिम

उनका कहना है कि इससे एसडीटीटी में निर्णय लेने की शक्ति कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित होने का जोखिम है। श्रीनिवासन ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह एसडीटीटी की संस्थागत अखंडता और उचित प्रशासन बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सर्कुलर के जरिए उन्हें ट्रस्टी के रूप में ‘निष्प्रभावी’ करने का प्रयास किया गया।

विवाद का एक अहम पहलू टाटा संस की भविष्य की सूचीबद्धता से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, 16 सितंबर के सर्कुलर में श्रीनिवासन को टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से संबंधित चर्चा और मतदान से अलग रखने की कोशिश की गई थी। श्रीनिवासन ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि टाटा संस के निदेशक के तौर पर उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने का दायित्व निभाना है।

टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में ट्रस्ट्स और होल्डिंग कंपनी के बीच संबंधों में बढ़ता यह विवाद टाटा समूह की व्यापक गवर्नेंस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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