मामलों को स्थानांतरित करने की NCLT के अधिकार की जांच

गुजरात उच्च न्यायालय ने अपने हाल के आदेश में कहा था कि यह शक्ति पूरी तरह राज्य के भीतर है
सुप्रीम कोर्ट
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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले की जांच करने पर सहमत हो गया, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) किसी लंबित याचिका को राज्य के बाहर किसी अन्य NCLT पीठ में स्थानांतरित नहीं कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने विभिन्न राज्यों में NCLT पीठों के बीच मामलों को स्थानांतरित करने की NCLT अध्यक्ष की शक्ति की जांच करने पर सहमति जताई है।

क्या है मामला : यह विवाद एनसीएलटी नियम, 2016 के नियम 16(डी) से उपजा है, जो एनसीएलटी अध्यक्ष को ''परिस्थितियां के हिसाब से किसी भी मामले को एक पीठ से दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने'' की अनुमति देता है। गुजरात उच्च न्यायालय ने अपने हाल के आदेश में कहा था कि यह शक्ति पूरी तरह राज्य के भीतर है। उच्च न्यायालय का कहना था कि न्यायाधिकरण के अध्यक्ष केंद्र सरकार द्वारा स्थापित क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को न तो बदल सकते हैं, न ही उसका विस्तार कर सकते हैं। इसका अर्थ है कि मामलों को एक राज्य से दूसरे राज्य में नहीं ले जाया जा सकता। इससे पहले, अहमदाबाद की दो NCLT पीठों ने आर्सेलरमित्तल से संबंधित मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था, जिसके बाद दिल्ली स्थित NCLTअध्यक्ष ने एक प्रशासनिक आदेश पारित कर मामले को मुंबई स्थानांतरित कर दिया था। आर्सेलरमित्तल ने NCLT के हटने और स्थानांतरण के आदेशों को नियमों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी।

स्थानांतरण ही एकमात्र रास्ता : शीर्ष अदालत ने इस रुख पर ''प्रथम दृष्टया संदेह'' जताया और एक काल्पनिक उदाहरण दिया कि यदि किसी स्थान पर केवल एक पीठ है और वहां के सदस्य को मामले से हटना पड़ता है, तो कार्यवाही को पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए राज्य की सीमाओं के बाहर स्थानांतरण ही एकमात्र रास्ता हो सकता है।

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