

नयी दिल्ली : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र की दक्षता बढ़ाने के लिए नीति आयोग ने सरकार की विभिन्न योजनाओं को एकसाथ जोड़ने की सिफारिश की। एक रिपोर्ट में आयोग ने कहा है कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए और विकास योजनाओं एवं कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का बेहतर समन्वय भी स्थापित किया जाए। रिपोर्ट में एमएसएमई इकाइयों का बाजार के साथ सहयोग मजबूत करने के लिए एक विशेष मार्केटिंग प्रकोष्ठ बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
उद्यमियों की भागीदारी : इस प्रकोष्ठ की घरेलू विपणन इकाई व्यापार मेलों, प्रदर्शनी और खरीदार-विक्रेता बैठकों में उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाएगी, जबकि विदेशी विपणन इकाई वैश्विक बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में समर्थन देगी। नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने इस रिपोर्ट को जारी किया। इसमें सरकारी योजनाओं को मिलाने के लिए सूचना का समन्वय और प्रक्रिया का समन्वय के दो-स्तरीय तरीके सुझाए गए हैं। इससे केंद्र और राज्य सरकारों के डेटा को जोड़कर योजनाओं में बेहतर तालमेल, निर्णय क्षमता और सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकेगी।
विशेष श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश : नीति आयोग ने ग्रामीण और कृषि-आधारित छोटे उद्योगों को उन्नत प्रशिक्षण और नवाचार तक पहुंच दिलाने के लिए मौजूदा योजनाओं को विशेष श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की है। आयोग ने ग्रामीण और कृषि आधारित छोटे उद्योगों के लिए संचालित ‘एस्पायर’ योजना को एमएसएमई नवाचार योजना में शामिल करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे इन उद्यमों को उन्नत प्रशिक्षण, नवाचार और समर्थन मिल सकेगा।
18 सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन : नीति आयोग ने इस समय संचालित 18 सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन करने के बाद कहा है कि योजनाओं का अलग-अलग और कभी-कभी पारस्परिक संघर्ष वाला संचालन लाभार्थियों तक पहुंच और असर को सीमित कर देता है। इन योजनाओं का समान और संयोजित क्रियान्वयन एमएसएमई क्षेत्र में संसाधनों का बेहतर उपयोग, आसान पहुंच और व्यापक विकास को सुनिश्चित करेगा।