

मुंबई : इस सप्ताह स्थानीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है क्योंकि निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी निर्णय, प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव पर नजर रख रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के निवेश का रुख भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। प्रमुख नीतिगत दर रेपो में फिलहाल बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई का दबाव बना हुआ है। वहीं विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक के रुख और भविष्य के अनुमान पर नजर रहेगी।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम : वैश्विक स्तर पर अमेरिका के मार्च महीने के महंगाई आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इससे वहां की मौद्रिक नीति और डॉलर की स्थिति पर असर पड़ेगा, जिसका प्रभाव भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बना रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और युद्धविराम के किसी ठोस संकेत से या तो बाजार में तेजी आ सकती है या फिर मौजूदा बिकवाली का दौर जारी रह सकता है।