दवा उद्योग की टेक्नोलॉजी अपग्रेड योजना में धीमी रफ्तार, 301 में सिर्फ 55 इकाइयों को मिला प्रोत्साहन

सरकारी योजना में स्वीकृत अधिकांश दवा इकाइयों को अब तक प्रोत्साहन न मिलने से टेक्नोलॉजी अपग्रेड की रफ्तार थमी, उत्पादन गुणवत्ता सुधार की कोशिशें प्रभावित
56 इकाइयों ने परियोजना पूरी होने की जानकारी दी है, लेकिन जरूरी प्रमाणपत्र जमा नहीं किए हैं।
दवा उद्योग की टेक्नोलॉजी अपग्रेड योजना में धीमी रफ्तार
Published on

नई दिल्ली : सरकार की दवा उद्योग के तकनीकी उन्नयन से जुड़ी योजना के तहत मंजूर 301 फार्मा इकाइयों में से मार्च 2026 तक केवल 55 इकाइयों को प्रोत्साहन राशि मिल पाई थी। संसद में पेश हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यह मंजूर इकाइयों का महज 18 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। प्रोत्साहन वितरण की धीमी रफ्तार ऐसे समय में है, जब दवा कंपनियों, खासकर एमएसएमई इकाइयों को संशोधित शेड्यूल एम के कड़े विनिर्माण मानकों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

300.5 करोड़ की सहायता मंजूर

रिवैम्प्ड फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन असिस्टेंस स्कीम (RPTUAS) के तहत सरकार ने 301 दवा इकाइयों के लिए कुल ₹300.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मंजूर की थी। इनमें से 64 इकाइयों के ₹45.8 करोड़ के दावे मंजूर हुए, जबकि अब तक 55 इकाइयों को ₹41.7 करोड़ का भुगतान किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बाकी 237 मंजूर इकाइयां अलग-अलग चरणों में हैं। इनमें 56 इकाइयों ने परियोजना पूरी होने की जानकारी दी है, लेकिन जरूरी प्रमाणपत्र जमा नहीं किए हैं। वहीं, 152 इकाइयां अभी अपनी परियोजनाओं को लागू कर रही हैं।

संशोधित शेड्यूल एम बनी चुनौती

RPTUAS का उद्देश्य एमएसएमई दवा इकाइयों को तकनीक और उत्पादन प्रक्रियाओं को उन्नत करने में वित्तीय सहायता देना है, ताकि वे संशोधित शेड्यूल एम और WHO-GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज) मानकों को पूरा कर सकें। उन्नयन पूरा होने और संबंधित औषधि नियामक प्राधिकरणों से सत्यापन के बाद ही सहायता जारी की जाती है।

देश में करीब 10,500 दवा विनिर्माण इकाइयां हैं, जिनमें लगभग 8,500 एमएसएमई श्रेणी की हैं। उद्योग संगठनों के अनुमानों के अनुसार, एमएसएमई इकाइयों में संशोधित शेड्यूल एम के अनुपालन की स्थिति अभी 50 प्रतिशत से भी कम है।

छोटी इकाइयों को हैंडहोल्डिंग की जरूरत

संशोधित मानक दिसंबर 2023 में अधिसूचित किए गए थे। इनमें विनिर्माण परिसर, उपकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन प्रक्रियाओं से जुड़े कड़े प्रावधान शामिल हैं। छोटी कंपनियों के लिए अनुपालन की समयसीमा बाद में बढ़ाकर दिसंबर 2025 की गई थी।

औषधि विभाग के अनुसार, छोटी कंपनियां उत्पादन प्रभावित न हो, इसलिए तकनीकी उन्नयन चरणबद्ध तरीके से कर रही हैं। संसदीय समिति ने विभाग से बाकी 237 इकाइयों के लिए सुविधा और मार्गदर्शन की प्रभावी व्यवस्था बनाने को कहा है, ताकि तकनीकी उन्नयन की प्रक्रिया तेज हो और दवा उद्योग समय पर नए गुणवत्ता मानकों का पालन कर सके।

56 इकाइयों ने परियोजना पूरी होने की जानकारी दी है, लेकिन जरूरी प्रमाणपत्र जमा नहीं किए हैं।
बढ़ती लागत का दबाव, सितंबर तिमाही में दाम और बढ़ा सकती हैं एफएमसीजी कंपनियां
Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in