शुरुआती तेजी के बाद शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा; Nifty 22,400 के नीचे

लगातार दो सत्रों की तेजी के बाद निवेशकों ने की मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ती बॉन्ड यील्ड से भी बाजार पर दबाव
शुरुआती तेजी के बाद शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा; Nifty 22,400 के नीचे
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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद अचानक दबाव बढ़ गया। कारोबार की शुरुआत में बढ़त बनाने वाले सेंसेक्स और निफ्टी ने जल्द ही अपनी अधिकांश बढ़त गंवा दी और लाल निशान में कारोबार करने लगे। दोपहर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स दिन के उच्च स्तर से 1,000 अंक से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी 22,400 के नीचे पहुंच गया। इससे पहले बाजार लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 400 अंक चढ़ा था और निफ्टी भी 22,600 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बाजार में पहले से बनी अनिश्चितता के बीच बिकवाली बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों की तेजी टिक नहीं पाई।

मुनाफावसूली से बढ़ा दबाव

पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली थी। ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे भाव पर शेयर बेचकर मुनाफा निकालना बेहतर समझा। बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक नए निवेश को लेकर सतर्क नजर आए। मुनाफावसूली का दबाव खास तौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में दिखाई दिया।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता

बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर भी बना हुआ है। विदेशी निवेशकों के बाजार से पैसा निकालने से शेयरों पर दबाव बढ़ता है। इसके साथ ही अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर पहुंचने से उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सतर्कता बढ़ी है। निवेशक अब महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े नए संकेतों पर भी नजर रख रहे हैं।

कच्चे तेल और वैश्विक हालात पर नजर

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। तेल महंगा रहने से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इससे रुपये और कंपनियों की लागत को लेकर भी चिंता बनी हुई है। हालांकि, सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी ने बाजार को सीमित राहत दी, लेकिन इससे निवेशकों की चिंता पूरी तरह दूर नहीं हुई।

आरबीआई के कदमों और महंगाई के आंकड़ों का इंतजार

भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को सहारा देने के लिए हाल में कुछ कदम उठाए हैं। निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि इन उपायों का मुद्रा बाजार और शेयर बाजार पर कितना असर पड़ता है। इसके अलावा महंगाई के आगामी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम होंगे। पिछले सप्ताह आरबीआई की मौद्रिक नीति में बदलाव के बाद ब्याज दरों को लेकर भी निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर है।

बाजार में सोमवार की गिरावट बताती है कि पिछले सत्रों की तेजी के बावजूद निवेशकों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।

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