

नई दिल्ली : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के सेटलमेंट नियमों में प्रस्तावित बदलाव वित्तीय गड़बड़ी, धन की हेराफेरी और गलत तरीके से धन निकालने से जुड़े मामलों में निवेशकों के हितों की रक्षा को मजबूत कर सकते हैं। नए नियमों का उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया के बजाय ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करना और निवेशकों का पैसा जल्द वापस लाना है।
सेबी बोर्ड ने पिछले सप्ताह ‘सेबी (Settlement of Administrative and Civil Proceedings) Regulations, 2026’ को मंजूरी दी। इनमें सेटलमेंट राशि तय करने के लिए स्पष्ट फार्मूला, गलत तरीके से हासिल लाभ की अलग गणना, कुछ मामलों में फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट और सेटलमेंट व्यवस्था तक व्यापक पहुंच का प्रावधान है। नियमों को अधिसूचित किए जाने के 30 दिन बाद लागू किया जाएगा।
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि यदि कंपनी से पैसा निकाला गया है तो उसे पहले वापस लाना जरूरी है। उनके मुताबिक निवेशक संरक्षण केवल सेटलमेंट राशि तक सीमित नहीं होगा, बल्कि ‘डिस्गॉर्जमेंट’ यानी गलत तरीके से हासिल लाभ की वापसी और रेमेडियल एंड रेगुलेटरी टर्म्स (आरआरटी) भी लागू होंगे।
नए ढांचे में शो-कॉज नोटिस से पहले सेटलमेंट नोटिस देने का प्रावधान होगा। संबंधित पक्ष को आवेदन के लिए 60 दिन मिलेंगे। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्मा के अनुसार इससे ब्याज समेत पैसा जल्दी वापस लाने में मदद मिल सकती है और इसका सबसे बड़ा लाभ शेयरधारकों को होगा।
कानूनी विशेषज्ञ सुमित अग्रवाल ने इसे अमेरिकी ‘वेल्स प्रक्रिया’ से broadly प्रेरित बताया, हालांकि उन्होंने सूचीबद्ध कंपनियों के लिए ऐसे नोटिस के अनिवार्य खुलासे को लेकर सेबी से स्पष्टता की जरूरत बताई।
नए नियमों में 2018 के नियमों के तहत आवेदन न कर पाने या आवेदन खारिज, वापस या लौटाए जाने वाले पात्र मामलों के लिए एक बार 90 दिन की अतिरिक्त खिड़की भी होगी। इसके लिए सेटलमेंट राशि पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना होगा और मामला लंबित होना जरूरी होगा।