

मुंबई : भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी-डे सेटलमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव में डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट के लिए दो विकल्प, ट्रेडिंग से ऑक्शन के बीच संक्रमण अवधि घटाने और बाजार के समय में बदलाव की संभावनाएं शामिल हैं। सेबी ने प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां देने के लिए 3 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है।
डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी सेटलमेंट के लिए पहले विकल्प में अंतिम 30 मिनट के लगातार कारोबार और 10 मिनट के CAS के वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य (VWAP) को मिलाकर सेटलमेंट प्राइस तय करने का सुझाव है। दूसरे विकल्प में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर केवल अंतिम 30 मिनट के लगातार कारोबार के VWAP को आधार बनाने का प्रस्ताव है। यह व्यवस्था इंडेक्स और शेयर, दोनों तरह के डेरिवेटिव्स पर लागू होगी।
सेबी ने CAS के दौरान इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस से तैयार होने वाले इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू (IIV) को दिखाना बंद करने का भी प्रस्ताव दिया है। हालांकि, अलग-अलग शेयरों के इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस को जारी रखने का सुझाव है। नियामक का कहना है कि IIV को वास्तविक इंडेक्स स्तर समझे जाने से निवेशकों के कारोबारी फैसले प्रभावित हो सकते हैं, जबकि यह वास्तव में हुए सौदों पर आधारित नहीं होता।
बाजार समय को लेकर एक विकल्प में CAS वाले शेयरों में लगातार कारोबार शाम 3:30 बजे तक, ऑक्शन 3:31 से 3:40 बजे तक और डेरिवेटिव्स कारोबार 3:45 बजे तक रखने का प्रस्ताव है। दूसरे विकल्प में मौजूदा 3:15 बजे के कटऑफ को बरकरार रखते हुए ऑक्शन 3:25 बजे और डेरिवेटिव्स कारोबार 3:30 बजे तक समाप्त करने का सुझाव है।
इसके अलावा, लगातार कारोबार और CAS के बीच पांच मिनट की संक्रमण अवधि को घटाकर करीब एक मिनट करने तथा CAS के बाद डेरिवेटिव्स कारोबार की 10 मिनट की अवधि को घटाकर पांच मिनट करने का प्रस्ताव है। CAS में मौजूदा 3 प्रतिशत मूल्य बैंड बनाए रखने और अन्य ऑर्डर संबंधी नियमों को भी जारी रखने का सुझाव दिया गया है।
सेबी ने शेयरों के डेरिवेटिव्स सेगमेंट के लिए CAS की शुरुआत 3 अगस्त 20 से की थी। नए प्रस्तावों का उद्देश्य एक्सपायरी के दौरान मूल्य निर्धारण और कारोबार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ बाजार में अनावश्यक भ्रम और अस्थिरता को कम करना है।