

मुंबई : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कॉरपोरेट बॉन्ड में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने, खासकर छोटे शहरों में निवेश की पहुंच मजबूत करने के लिए Fixed Income Channel Partners (FICPs) का नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव दिया है।
इसके तहत FICPs को स्टॉक एक्सचेंजों के साथ सूचीबद्ध किया जाएगा और Online Bond Platform Providers (OBPPs) उनके जरिए अनुमत फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज का वितरण और लेनदेन सुगम कराएंगे।
सेबी का उद्देश्य काफी हद तक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर मॉडल की तर्ज पर बॉन्ड की पहुंच बढ़ाना है। खासकर Tier-II और Tier-III शहरों में पहले से मौजूद वित्तीय वितरण नेटवर्क का इस्तेमाल करके ज्यादा लोगों तक कॉरपोरेट बॉन्ड पहुंचाने की कोशिश होगी।
कम से कम 12वीं कक्षा की योग्यता
अच्छी प्रतिष्ठा
धोखाधड़ी या बेईमानी से जुड़े अपराध में दोषसिद्धि न होना
National Institute of Securities Markets (NISM) का वैध फिक्स्ड-इनकम सर्टिफिकेशन
शामिल हैं। Association of Mutual Funds in India (AMFI) के पंजीकृत डिस्ट्रीब्यूटर संबंधित NISM प्रमाणन के अधीन बिना एनलिस्टमेंट फीस के FICP के लिए आवेदन कर सकेंगे।
FICPs निवेशकों के लिए ऑनबोर्डिंग, दस्तावेजीकरण, KYC और लेनदेन में सहायता करेंगे। वे कई OBPPs के साथ काम कर सकेंगे।
हालांकि, उनके पास ग्राहक के पैसे या सिक्योरिटीज रखने की अनुमति नहीं होगी। ग्राहक के ऑर्डर सीधे OBPP के प्लेटफॉर्म के जरिए भेजे जाएंगे।
OBPPs पर FICPs की जांच, निगरानी और रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन की जिम्मेदारी होगी। उन्हें अपने FICPs के काम और चूक के लिए भी जवाबदेह बनाया जाएगा।
सेबी के प्रस्ताव के अनुसार FICPs को भुगतान केवल उस OBPP से मिलेगा जिसने उन्हें नियुक्त किया है। वे ग्राहकों से सीधे शुल्क नहीं ले सकेंगे।
ग्राहकों से लिए जाने वाले शुल्क, ब्रोकरेज या कमीशन को निवेश राशि के 2.5 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव है।
भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार पिछले दशक में काफी बड़ा हुआ है। बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड FY15 के करीब 17.5 लाख करोड़ से बढ़कर 31 जुलाई 2026 तक 60 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गए हैं।
लेकिन बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी अभी भी सीमित है। इसकी एक वजह यह है कि भारत में करीब 98 प्रतिशत कॉरपोरेट बॉन्ड निजी प्लेसमेंट के जरिए जारी होते हैं, इसलिए उनका बड़ा हिस्सा स्वाभाविक रूप से संस्थागत निवेशकों तक पहुंचता है।
सेबी का नया FICP मॉडल इसी वितरण की कमी को दूर करने की कोशिश है।
डेट मार्केट के RFQ प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग गतिविधि भी तेजी से बढ़ी है। FY25 में करीब 2.76 लाख ट्रेड हुए थे, जो FY26 में बढ़कर 17.84 लाख हो गए।
इससे संकेत मिलता है कि तकनीक-समर्थ रिटेल निवेशकों की बॉन्ड में दिलचस्पी बढ़ रही है। FICP नेटवर्क के जरिए सेबी अब इस डिजिटल पहुंच को स्थानीय और व्यक्तिगत वितरण नेटवर्क से जोड़ना चाहता है।