

नई दिल्ली : विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए भारत में निवेश की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मिलकर काम कर रहे हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को कहा कि दोनों नियामक एफपीआई रजिस्ट्रेशन को तेज, सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में कई कदम उठा रहे हैं। कुछ देशों के लिए पांच कार्यदिवस में एफपीआई ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।
एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया के वार्षिक सम्मेलन में पांडेय ने कहा कि सेबी और RBI एफपीआई से जुड़े विभिन्न मुद्दों को मिलकर सुलझा रहे हैं। उनका लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें विदेशी निवेशक कम समय और कम कागजी प्रक्रिया के साथ भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकें।
कुछ देशों के निवेशकों के लिए कस्टोडियन और डिपॉजिटरी की मदद से पांच कार्यदिवस में ऑनबोर्डिंग का परीक्षण सफल रहा है।
भौतिक दस्तावेजों की जगह डिजिटल सिग्नेचर को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे अपोस्टिल और नोटरीकरण की जरूरत कम होगी।
एनएसडीएल के फ्रंट-एंड को नया रूप देने के साथ India Market Access Portal शुरू किया गया है, जहां एफपीआई के लिए जरूरी शर्तें, दस्तावेज और FAQ एक जगह उपलब्ध हैं।
फिजिकल पावर ऑफ अटॉर्नी की जगह ई-पावर ऑफ अटॉर्नी की व्यवस्था की गई है।
सेबी और RBI KYC प्रक्रिया को भी सरल बनाने पर काम कर रहे हैं। RBI विदेशी बैंकों की संबंधित शाखाओं को दस्तावेज प्रमाणित करने की अनुमति दे चुका है और SWIFT के जरिए दस्तावेज अपलोड करने की संभावना भी देख रहा है।
पांडेय ने कहा कि सेबी एक्सचेंजों पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले बॉन्ड इंडेक्स विकसित करने के लिए RBI के साथ काम कर रहा है। RBI ने मसौदा दिशानिर्देश जारी कर सुझाव मांगे हैं।
उन्होंने बताया कि अगस्त 2026 तक PMS उद्योग का एयूएम करीब 9.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2015-16 के 1.4 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजरों की संख्या 530 और डिस्क्रिशनरी PMS ग्राहकों की संख्या करीब 2.2 लाख हो गई है।
नए PMS ढांचे में PRIM के तहत 25 लाख रुपये के न्यूनतम निवेश के साथ ETF, इंडेक्स फंड और SIF जैसे विकल्पों में निवेश की सुविधा दी गई है। साथ ही स्वतंत्र फंड मैनेजरों की व्यवस्था भी शुरू की गई है।