

मुंबई : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बकाया भुगतान वाले (अनपेड) शेयरों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब ऐसे शेयर सीधे निवेशक के डीमैट खाते में जमा होंगे, लेकिन भुगतान पूरा होने तक वे ब्रोकर के पक्ष में गिरवी (प्लेज) रहेंगे।
सेबी के अनुसार, ब्रोकर को निवेशक को ईमेल या एसएमएस के जरिए बकाया राशि और समय पर भुगतान नहीं होने पर शेयर बेचने की संभावना की जानकारी देनी होगी। ब्रोकर को अनपेड शेयरों के संबंध में स्पष्ट नीति भी बनानी होगी, जिसमें भुगतान की समय-सीमा, प्लेज हटाने और शेयर बेचने की प्रक्रिया शामिल होगी।
नए नियम के तहत निवेशक को भुगतान के लिए अधिकतम पांच कारोबारी दिनों का समय मिलेगा। यदि इस अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो ब्रोकर गिरवी शेयर बेचकर अपनी बकाया राशि वसूल सकेगा। बची हुई राशि निवेशक को लौटानी होगी।
सेबी ने निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए यह भी व्यवस्था की है कि यदि ब्रोकर पांच कारोबारी दिनों के भीतर न तो शेयर बेचे और न ही प्लेज हटाए, तो छठे कारोबारी दिन डिपॉजिटरी अपने आप प्लेज समाप्त कर देगी और शेयर पूरी तरह निवेशक के नियंत्रण में आ जाएंगे।
इसके अलावा, ब्रोकर इन गिरवी रखे गए शेयरों का इस्तेमाल बैंकों या गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने के लिए नहीं कर सकेंगे।