सेबी ने निपटान राशि का नया फॉर्मूला किया अधिसूचित, 10 लाख तक के मामले तेजी से निपटेंगे

सेबी ने निपटान प्रक्रिया को बनाया सरल, 10 लाख तक के मामलों में होगी तेजी
नए नियमों का उद्देश्य निपटान प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और अधिक अनुमानित बनाना है।
सेबी ने निपटान राशि का नया फॉर्मूला किया अधिसूचित, 10 लाख तक के मामले तेजी से निपटेंगे
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नई दिल्ली : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निपटान समझौते के तहत देय राशि की गणना के लिए नया फॉर्मूला अधिसूचित किया है। इसके साथ ही 10 लाख रुपये तक की निपटान राशि वाले मामलों के लिए त्वरित प्रक्रिया शुरू की गई है। छह अक्टूबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, नए नियमों का उद्देश्य निपटान प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और अधिक अनुमानित बनाना है।

नए प्रावधानों के तहत गलत तरीके से अर्जित लाभ, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की राशि को निपटान राशि की गणना से अलग रखा जाएगा। इन राशियों का आकलन होने के बाद अलग से वसूली की जाएगी। इससे समझौते के दौरान एक ही राशि की दोहरी गणना से बचा जा सकेगा।

न्यूनतम जुर्माने से तय होगी आधार राशि

नए फॉर्मूले में संबंधित प्रतिभूति कानून के तहत उल्लंघन के लिए निर्धारित न्यूनतम जुर्माने को आधार बनाया जाएगा। इसके बाद मामले में कार्यवाही के चरण, पहले की नियामकीय कार्रवाई, उल्लंघन की गंभीरता, उसे बढ़ाने या कम करने वाले कारकों और कानूनी खर्चों के आधार पर राशि में बदलाव किया जाएगा।

निपटान की शर्तों में समझौता राशि के अलावा, जहां लागू हो, गलत तरीके से अर्जित लाभ की वापसी और सुधारात्मक व नियामकीय उपाय भी शामिल होंगे। पहले इन उपायों को गैर-मौद्रिक शर्तें कहा जाता था।

10 लाख तक के मामलों के लिए त्वरित प्रक्रिया

सेबी ने त्वरित निपटान के दो तरीके तय किए हैं। पहला, उल्लंघन के प्रकार के आधार पर और दूसरा, निपटान राशि की सीमा के आधार पर। 10 लाख रुपये तक की राशि वाले मामलों को आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजा जाएगा।

उल्लंघन के प्रकार पर आधारित प्रक्रिया में सेबी संबंधित इकाई को नोटिस देकर उसमें बताई गई राशि का भुगतान कर मामला निपटाने का अवसर देगा। भुगतान के बाद सदस्यों का पैनल निपटान आदेश जारी करेगा। इसमें कुछ खुलासों से जुड़े उल्लंघन भी शामिल होंगे।

वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी पर भी प्रावधान

नए नियमों में वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने और धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में भी निपटान की अनुमति दी गई है। हालांकि, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने होंगे, जिनमें जरूरी खुलासे करना और दुरुपयोग की गई राशि वापस करना शामिल है।

सेबी के अनुसार, नए नियमों से कम गंभीर मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा, जबकि प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन पर निवारक कार्रवाई का उद्देश्य भी बरकरार रहेगा। सेबी के निदेशक मंडल ने पिछले महीने हुई बैठक में इन नियमों को मंजूरी दी थी।

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