

नई दिल्ली : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के नियामकीय ढांचे में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजरों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ाए गए हैं, जबकि कुछ अनुपालन संबंधी शर्तों में राहत दी गई है। ये फैसले 24 सितंबर को हुई सेबी बोर्ड की बैठक में लिए गए।
संशोधित ढांचे के तहत PMS मैनेजर अब ग्राहकों के प्रबंधनाधीन संपत्ति (AUM) के 1.25 गुना तक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में निवेश कर सकेंगे। उन्हें आईपीओ और डेट मार्केट में प्राथमिक निर्गम में भी निवेश की अनुमति दी गई है। PMS के लिए मौजूदा न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपये पर बरकरार रखी गई है।
सेबी ने डिस्क्रेशनरी PMS के तहत विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश की भी अनुमति दी है। इससे पोर्टफोलियो मैनेजरों को विदेशी बाजारों में सूचीबद्ध इक्विटी और डेट प्रतिभूतियों में निवेश का विकल्प मिलेगा। इसका उद्देश्य PMS ग्राहकों के लिए निवेश का दायरा बढ़ाना और पोर्टफोलियो प्रबंधन में अधिक लचीलापन देना है।
सेबी ने अनुपालन के मोर्चे पर भी राहत दी है। PMS के मौजूदा 0.5 प्रतिशत सालाना ऑपरेटिंग एक्सपेंस कैप की गणना में अब वैधानिक शुल्क को शामिल नहीं किया जाएगा। इससे निर्धारित खर्च सीमा के भीतर पोर्टफोलियो मैनेजरों को कुछ अतिरिक्त गुंजाइश मिलेगी।
PMS उद्योग में भी हाल के वर्षों में तेजी से विस्तार हुआ है। सेबी के जुलाई में जारी प्रस्ताव के अनुसार, पोर्टफोलियो मैनेजरों के तहत प्रबंधनाधीन संपत्ति अप्रैल 2019 के 18.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मई 2026 में 42.61 लाख करोड़ रुपये हो गई। नए बदलावों का उद्देश्य निवेश विकल्प बढ़ाने के साथ PMS नियमों को अधिक सुव्यवस्थित करना है।