

मुंबई : डॉलर के मुकाबले रुपया 30 अप्रैल को गिरकर 95.35 पर आ गया था। यह रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर है। बाद में इसमें सुधार हुआ। इसके साथ यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चार पैसे मजबूत होकर 94.84 पर रहा। अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितताओं ने रुपये की धारणा को प्रभावित किया और इसकी बढ़त पर अंकुश लगाया। रुपये में कमजोरी की कई वजहें हैं। इनमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली और डॉलर में मजबूती का हाथ है। अमरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से डॉलर में मजबूती दिखी है।
क्यों है रुपये पर दबाव : जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, “तीन प्रमुख कारणों के संयुक्त प्रभाव से रुपये पर दबाव बना हुआ है। पहला, ब्रेंट क्रूड की कीमत 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारत के व्यापार और चालू खाता घाटे के बढ़ने की आशंका है। दूसरा, कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े निवेश के बढ़ते आकर्षण के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली जारी है। तीसरा, अमेरिका में बढ़ती महंगाई के कारण वहां के 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल 4.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे पूंजी की निकासी को बढ़ावा मिल सकता है।
डॉलर सूचकांक : छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.47 पर आ गया।
ब्रेंट क्रूड : अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव वायदा कारोबार में 1.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 116.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।