

मुंबई : कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक अनिश्चितताओं और मजबूत डॉलर के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव कायम रहा। इससे रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 39 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 96.20 पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव से वैश्विक बाजार धारणा प्रभावित बनी हुई है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है।
क्या रही स्थिति : अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.19 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह और टूटकर 96.39 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। अंत में रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर रहा। रुपया शुक्रवार को पहली बार 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया था और 95.81 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।
क्या है संभावना : मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी के कारण रुपये में कमजोर रुख बना रह सकता है। जारी वैश्विक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी भी रुपये पर दबाव डाल सकती है। एफपीआई ने मई में अबतक भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 27,048 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, इसके साथ ही 2026 में अबतक एफपीआई कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। यह राशि पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप और सोने-चांदी के आयात पर लगाए गए कुछ अंकुश निचले स्तर पर रुपये को समर्थन दे सकते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया का हाजिर भाव 96 से 96.60 के दायरे में रह सकता है।
डॉलर सूचकांक : दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.14 प्रतिशत गिरकर 99.14 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.65 प्रतिशत बढ़कर 109.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।