रुपया 41 पैसे की जोरदार गिरावट के साथ 91.49 प्रति डॉलर पर

विदेशी कोषों की निकासी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव को और बढ़ा दिया
रुपया  - डॉलर
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मुंबई : अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की धारणा प्रबल होने से सोमवार को रुपया 41 पैसे की जोरदार गिरावट के साथ 91.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली और विदेशी कोषों की निकासी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव को और बढ़ा दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.23 पर खुला और कारोबार के दौरान इसने 91.65 का निचला स्तर छुआ। अंत में रुपया पिछले बंद भाव के मुकाबले 41 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 91.49 पर बंद हुआ।शुक्रवार को रुपया 17 पैसे टूटकर 91.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

रुपये पर दबाव : एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक, दिलीप परमार ने कहा, ‘‘ईरान संकट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय रुपये में जनवरी के आखिर के बाद से एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई। रुपये पर दबाव बना हुआ है क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश वाली आस्तियों की ओर जा रहे हैं, शेयर बाजार से विदेशी पूंजी निकल रही है, और इस बात का डर बढ़ रहा है कि महंगे आयात से व्यापार संतुलन को नुकसान होगा।’’

आधा प्रतिशत की गिरावट : मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि सप्ताहांत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में उपजी अनिश्चितता के कारण रुपये में लगभग आधा प्रतिशत की गिरावट आई।विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में रातों-रात हुई वृद्धि ने रुपये पर दबाव डाला। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 91.46/47 के स्तर पर ‘हस्तक्षेप’ ने रुपये को 91.50 के स्तर पर सुरक्षा प्रदान की।

डॉलर सूचकांक : इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.82 प्रतिशत बढ़कर 98.41 पर कारोबार कर रहा था।

ब्रेंट क्रूड : वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 7.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

आयात बिल में भारी वृद्धि का जोखिम : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत के आयात बिल में भारी वृद्धि का जोखिम उत्पन्न हो गया है, क्योंकि देश अपनी ईंधन आवश्यकताओं का 85 प्रतिशत आयात के माध्यम से पूर्ण करता है।

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