

मुंबई : अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने से पश्चिम एशिया में अनिश्चितता का माहौल छा गया जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बढ़ गई। इससे रुपया सोमवार को 52 पैसे टूटकर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 93.35 पर बंद हुआ। अमेरिका के ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी करने की घोषणा के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को लेकर अनिश्चितताओं ने घरेलू बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी को और तेज कर दिया जिससे भारतीय मुद्रा कमजोर हो गई।
क्या रही स्थिति : अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 93.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 93.40 के निचले स्तर तक गया और 93.25 के उच्च स्तर तक आया। अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 93.35 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 52 पैसे की गिरावट है। रुपया शुक्रवार को 32 पैसे टूटकर 92.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। ‘आंबेडकर जयंती’ के मौके पर विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार मंगलवार को बंद रहेगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ : मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति से रुपये में गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती ने भी घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला। अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रुपया और कमजोर पड़ सकता है। विदेशी निवेशक भी पूंजी बाजारों से बिकवाली जारी रख सकते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 93 से 93.80 के बीच रहने का अनुमान है।
डॉलर सूचकांक : इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.75 पर रहा।