अल-नीनो का खतरा बढ़ा, घटते दाल आयात से महंगाई की चिंता

घरेलू उत्पादन पर अल-नीनो की मार का डर, कम आयात से दालों की महंगाई का जोखिम बढ़ा; निजी एजेंसी की चेतावनी के बीच केंद्र ने घबराने से मना किया
अल-नीनो के संभावित प्रभाव और घरेलू उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंता के बीच दालों के आयात में कमी ने कीमतों को लेकर आशंका बढ़ा दी है।
अल-नीनो का खतरा बढ़ा, घटते दाल आयात से महंगाई की चिंता
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नई दिल्ली : अल-नीनो के संभावित प्रभाव और घरेलू उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंता के बीच दालों के आयात में कमी ने कीमतों को लेकर आशंका बढ़ा दी है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने इस साल 70 फीसदी सूखे की संभावना जताई है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है और फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।

2026 में 31.80 लाख टन दाल का हुआ आयात

2026 के पहले छह महीनों में भारत ने 31.80 लाख टन दालों का आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि के 32.27 लाख टन से 1.46 फीसदी कम है। इस दौरान तुअर का आयात करीब 5.05 लाख टन रहा। मोजाम्बिक 1.83 लाख टन से अधिक आपूर्ति के साथ सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा। इसके बाद म्यांमार, तंजानिया और सूडान का स्थान रहा।

108.14 लाख हेक्टेयर में हुई दलहन की बुआई

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त तक देश में 108.14 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 108.49 लाख हेक्टेयर था। अरहर और मूंग की बुआई में भी कमी दर्ज की गई है। अरहर का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 1.69 लाख हेक्टेयर और मूंग का 1.37 लाख हेक्टेयर कम है।

30 लाख टन दाल का बफर स्टॉक तैयार

विशेषज्ञों की चिंता केवल रकबे को लेकर नहीं, बल्कि पैदावार को लेकर भी है। अगस्त के अंत से सितंबर के दौरान मौसम में बदलाव का असर फसल की उत्पादकता पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हाल में चने की कीमत 6,100 से बढ़कर करीब 6,400 रुपये प्रति क्विंटल हो चुकी है।

महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार ने करीब 30 लाख टन दालों का बफर स्टॉक तैयार किया है। कीमतों में असामान्य तेजी आने पर सरकार इस स्टॉक से बाजार में आपूर्ति बढ़ाएगी।

अल-नीनो के संभावित प्रभाव और घरेलू उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंता के बीच दालों के आयात में कमी ने कीमतों को लेकर आशंका बढ़ा दी है।
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