

नई दिल्ली : भारतीय इंजीनियरिंग सामान की विदेशों में मांग मजबूत बनी हुई है। जुलाई 2026 में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 12.24 अरब डॉलर हो गया, जो जुलाई 2025 में 10.40 अरब डॉलर था। अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में मांग बढ़ने से निर्यात को मजबूती मिली है।
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में हर महीने इंजीनियरिंग सामान का निर्यात 10 अरब डॉलर से अधिक रहा है। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान कुल इंजीनियरिंग निर्यात 46.38 अरब डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 39.24 अरब डॉलर था। इस तरह इसमें 18.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी इस अवधि में 26.7 प्रतिशत रही।
अमेरिका भारतीय इंजीनियरिंग सामान का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। जुलाई में अमेरिका को इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 20 प्रतिशत बढ़कर 2.18 अरब डॉलर हो गया।
अप्रैल-जुलाई के दौरान अमेरिका को भारत से 7.78 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग सामान का निर्यात हुआ, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 11.8 प्रतिशत अधिक है।
चीन में भी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बढ़ी है। जुलाई में चीन को निर्यात 32 प्रतिशत बढ़कर 34.9 करोड़ डॉलर हो गया। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका के साथ चीन भी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण बाजार बन रहा है।
जर्मनी, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे अन्य प्रमुख बाजारों में भी अप्रैल-जुलाई के दौरान निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सऊदी अरब को निर्यात में गिरावट रही।
जुलाई में इंजीनियरिंग सामान की 34 प्रमुख श्रेणियों में से 27 में निर्यात बढ़ा, जबकि सात श्रेणियों में गिरावट रही।
जिन श्रेणियों में गिरावट दर्ज की गई, उनमें लोहा एवं इस्पात उत्पाद, सीसा उत्पाद, मशीन टूल्स, विमान एवं अंतरिक्ष यान के हिस्से, कार्यालय उपकरण तथा क्रेन, लिफ्ट और अन्य भारी मशीनरी शामिल हैं।
इंजीनियरिंग निर्यात में मजबूत वृद्धि के बावजूद निर्यातकों के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं। इंजीनियरिंग निर्यातकों के संगठन ईईपीसी इंडिया के अनुसार, बढ़ती ऊर्जा और माल ढुलाई लागत, भू-राजनीतिक तनाव, संरक्षणवादी नीतियां और दूसरे देशों के कड़े तकनीकी मानक कारोबार के लिए चुनौती बने हुए हैं।
संगठन के मुताबिक, इस वृद्धि को बनाए रखने के लिए भारतीय कंपनियों को लागत घटाने, उत्पादन का पैमाना बढ़ाने, तकनीकी क्षमता मजबूत करने, नियामकीय अनुपालन बेहतर करने और नए बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।
सरकार के जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का कुल वस्तु निर्यात 44.24 अरब डॉलर रहा। इसमें इंजीनियरिंग सामान की हिस्सेदारी 12.24 अरब डॉलर थी, जो कुल वस्तु निर्यात का करीब 27.7 प्रतिशत है।
अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में मांग में सुधार से भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग को फिलहाल मजबूत समर्थन मिल रहा है। हालांकि, वैश्विक लागत और व्यापार संबंधी चुनौतियों के बीच इस गति को बनाए रखना निर्यातकों के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।