

नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण व्यवधान झेल रहे देश के निर्यातकों को राहत देने के लिए सरकार ने 497 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली ‘रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन’ (रिलीफ) योजना को शुरू की। वाणिज्य मंत्रालय में सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, हम निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत एक नई योजना की घोषणा कर रहे हैं। यह विशेष रूप से उन 17-18 भौगोलिक क्षेत्रों में काम करने वाले निर्यातकों पर केंद्रित है जो इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं। इसका मकसद उनके सामने आ रही चुनौतियों को कम करना है।
अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन : विभिन्न सरकारी विभागों जैसे वाणिज्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, बंदरगाह एवं नौवहन, वित्तीय सेवा विभाग, विदेश मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), सीबीआईसी आदि को शामिल करते हुए एक अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) का गठन किया गया है। यह माल ढुलाई की स्थिति के आधार पर विकसित हो रहे हालात का आकलन करने के लिए प्रतिदिन बैठक करेगा। ईसीजीसी (भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम) को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नियुक्त करते हुए, राहत योजना के तहत पैकेज में निर्यात दायित्वों का स्वचालित विस्तार, लॉजिस्टिक संबंधी सहायता एवं खेप में देरी को प्रबंधित करने के लिए संभावित वित्तीय उपाय शामिल किए गए हैं। यह योजना मुख्य रूप से उन खेप पर लागू होती है जिनकी आपूर्ति संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इजराइल और यमन जैसे देशों से होती है या जो वहां से होकर गुजरते हैं।
तीन प्रमुख हिस्से : इस योजना के तीन प्रमुख हिस्से हैं। पहले हिस्से के तहत निर्यात दायित्व विस्तार शामिल है। अग्रिम अनुमति और ईपीसीजी अनुमति (जो एक मार्च से 31 मई, 2026 के बीच देय हैं) का स्वतः विस्तार 31 अगस्त, 2026 तक बिना किसी जुर्माने के किया जाएगा। यह 14 फरवरी से 15 मार्च तक की तत्काल एक महीने की अवधि में ईसीजीसी द्वारा पहले से बीमित खेपों की सुरक्षा करता है। दूसरे हिस्से का उद्देश्य 16 मार्च से 15 जून तक की तीन महीने की अवधि में आगामी निर्यात खेपों के लिए ईसीजीसी ‘कवरेज’ को प्रोत्साहित करना और सुगम बनाना है। तीसरी घटक विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) को अधिभार के झटकों से बचाने के लिए बनाया गया है। यह 2014 फरवरी से 2015 मार्च तक एक महीने की अवधि में असाधारण माल ढुलाई और बीमा लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति करता है। यह उन एमएसएमई निर्यातकों पर लागू होता है जिन्होंने ईसीजीसी ‘कवरेज’ नहीं लिया है।