

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच करीब साढ़े तीन साल बाद नीतिगत रेपो दर में बढ़ोतरी की है। बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी है। साथ ही MPC ने अपना रुख ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘जरूरत के अनुसार सख्त’ कर दिया है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि निकट अवधि में नीतिगत दर में कटौती का विकल्प नहीं है। आगे की कार्रवाई परिस्थितियों और आर्थिक परिदृश्य के आधार पर दर बढ़ाने या उसे मौजूदा स्तर पर बनाए रखने तक सीमित रह सकती है। इसका सीधा असर बैंकिंग कर्ज की लागत पर पड़ सकता है और आवास, वाहन तथा अन्य ऋण की ईएमआई बढ़ सकती है।
RBI ने इस फैसले के साथ वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। अगस्त में CPI महंगाई 4.8 प्रतिशत रही थी। कमजोर मानसून, अल नीनो, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में दबाव और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव को महंगाई के प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है।
वहीं, केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया है। पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही। RBI का अगला MPC बैठक 2 से 4 दिसंबर को होगा।
RBI ने हालांकि अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत, तीसरी में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक घरेलू खपत, निवेश और निर्यात से आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल रही है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, व्यापार बाधाएं और वैश्विक वित्तीय सख्ती जोखिम बने हुए हैं।
महंगाई के मोर्चे पर RBI ने खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। तीसरी तिमाही में इसके 6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। अगस्त में CPI महंगाई 4.8 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 4.5 प्रतिशत थी। कमजोर मानसून, अल नीनो और खाद्य व ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रमुख जोखिम माना गया है।
रेपो रेट बढ़ने से रियल एस्टेट पर भी असर पड़ सकता है। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंची ब्याज दरों से होम लोन महंगा होने के कारण मांग पर कुछ दबाव आ सकता है, लेकिन मजबूत मांग, त्योहारी सीजन और रोजगार वाले बाजारों के कारण क्षेत्र की रफ्तार पूरी तरह थमने की संभावना नहीं है। अगली MPC बैठक 2 से 4 दिसंबर को होगी।