आरबीआई ने रेपो दर को 5.25% पर यथावत रखा

आरबीआई ने इसके साथ सतर्क रुख अपनाते हुए ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति का रुख अपनाया है
RBI
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा इंटरनेट
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मुंबई : वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। आरबीआई ने इसके साथ सतर्क रुख अपनाते हुए ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति का रुख अपनाया है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में लगभग 40 दिन चले युद्ध के कारण कच्चे तेल दाम में उल्लेखनीय तेजी आई है। इससे ईंधन के आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए मुद्रास्फीतिक दबाव बढ़ा है। हालांकि, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध विराम से वैश्विक स्तर पर पुनरुद्धार की उम्मीद भी बंधी है।

क्या है रेपो : रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई के रेपो दर को यथावत रखने के फैसले से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त जस-की-तस बने रहने की संभावना है।

वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ीं : आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, पिछली नीतिगत बैठक के बाद से, वैश्विक अनिश्चितताएं काफी बढ़ गई हैं। हालांकि, कुल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और लक्ष्य से नीचे है, लेकिन ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के दबाव और खाद्य कीमतों को प्रभावित करने वाली संभावित मौसम संबंधी गड़बड़ियों के कारण मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण के लिए जोखिम बढ़ गए हैं। मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति का दबाव कम बना हुआ है, हालांकि आपूर्ति श्रृंखला में समस्याओं को देखते हुए आने वाले समय में महंगाई की दिशा को लेकर अनिश्चितता है।

आर्थिक वृद्धि : आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित 7.6 प्रतिशत से कम है। आरबीआई ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण जिंस की ऊंची कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण वृद्धि दर में नरमी रह सकती है।

कितनी रहेगी जीडीपी : नई जीडीपी श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) के तहत दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 2025-26 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

खुदरा महंगाई : रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई ने कारोबार सुगमता के लिए भी कदम उठाने की घोषणा की।

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