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फैक्ट्री से निकलने वाली पॉलीथिन पर कब लगेगी रोक !
जितेन्द्र, सन्मार्ग संवाददाता सांकतोड़िया : पॉलीथिन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची आसनसोल नगर निगम की टीम को चिनाकुड़ी बाजार में दुकानदारों के विरोध का सामना करना पड़ा। टीम ने बाजार की दुकानों में पॉलीथिन की जांच की और प्रत्येक दुकानदार से 200 रुपये जुर्माना वसूले जाने की बात सामने आई। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने निगम की टीम के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। देखते ही देखते जांच अभियान पॉलीथिन से निकलकर प्रदूषण और रेल साइडिंग में स्पंज आयरन की अनलोडिंग तक पहुंच गया। दुकानदारों ने सवाल किया कि यदि पॉलीथिन प्रदूषण का बड़ा कारण है तो केवल दुकानदारों पर कार्रवाई क्यों ? पॉलीथिन बनाने वाली फैक्ट्रियों और बाजार तक इसकी आपूर्ति करने वालों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की जाती ? दुकानदारों का कहना था कि बाजार में उपलब्ध पॉलीथिन का इस्तेमाल करने पर उन्हें दंडित किया जा रहा है, लेकिन इसकी बिक्री और उत्पादन के स्रोत पर रोक लगाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगाn? कौन-सा पॉलीथिन चलेगा, पहले सैंपल दिखाइए कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने निगम की टीम से पूछा कि आखिर कौन-सा पॉलीथिन प्रतिबंधित है और कौन-सा इस्तेमाल किया जा सकता है। दुकानदारों ने प्रतिबंधित पॉलीथिन का सैंपल दिखाने की मांग की। उनका कहना था कि यदि नियम के तहत किसी खास मोटाई या मानक वाले प्लास्टिक पर रोक है तो दुकानदारों को भी इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। दुकानदारों के सवालों के बीच बाजार का माहौल गर्म हो गया। दुकानदारों ने कहा कि वे पॉलीथिन से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उनका कहना था कि पहले दुकानदारों को जागरूक किया जाए और फिर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाए। बाजार में पॉलीथिन पर रोक, रेल साइडिंग की धूल पर कौन बोलेगा ?’ दुकानदारों ने निगम की टीम के सामने चिनाकुड़ी बाजार के समीप रेल साइडिंग में स्पंज आयरन की अनलोडिंग का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि अनलोडिंग के दौरान बड़ी मात्रा में धूल उड़ती है, जिससे आसपास के इलाके में प्रदूषण फैलने की शिकायत रहती है। दुकानदारों ने सवाल किया कि यदि पॉलीथिन से होने वाला प्रदूषण प्रशासन के लिए चिंता का विषय है तो रेल साइडिंग में सामग्री की अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल की भी जांच होनी चाहिए।

