

शेयर बाजार में जल्द एक ऐसी स्थिति बनने वाली है जो पहली नजर में थोड़ी अजीब लग सकती है। जिस NSE के प्लेटफॉर्म पर रोज लाखों निवेशक शेयरों की खरीद-बिक्री करते हैं, उसी NSE के अपने शेयरों की ट्रेडिंग उसके प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी। NSE का IPO 17 सितंबर को खुलेगा और इसके बाद उसके शेयर BSE पर सूचीबद्ध होंगे। सवाल है कि आखिर NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग क्यों नहीं कर सकता?
इसके पीछे बाजार की निष्पक्षता और हितों के टकराव से जुड़ा नियम है। किसी स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही शेयरों की ट्रेडिंग की सुविधा देने पर एक ऐसी स्थिति बन सकती है, जहां वही संस्था शेयर की ट्रेडिंग का प्लेटफॉर्म भी चलाए और अपने शेयरों से जुड़े बाजार की निगरानी भी करे।
इसी तरह के संभावित हितों के टकराव को देखते हुए SEBI के नियम मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही सूचीबद्ध शेयरों की ट्रेडिंग अपने प्लेटफॉर्म पर करने की अनुमति नहीं देते। NSE के MD और CEO आशीषकुमार चौहान ने भी साफ किया है कि एक्सचेंज ने अपने शेयरों को NSE पर ट्रेड कराने के लिए SEBI से अनुमति नहीं मांगी है।
NSE के शेयर BSE पर सूचीबद्ध होंगे। यानी IPO के बाद जिन निवेशकों के पास NSE के शेयर होंगे, वे उनकी खरीद-बिक्री BSE के जरिए कर सकेंगे। यह व्यवस्था इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि NSE खुद भारत के प्रमुख शेयर बाजारों में से एक है। लेकिन किसी एक्सचेंज का सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होना और उसके अपने शेयरों की ट्रेडिंग किस एक्सचेंज पर होगी, ये अलग-अलग नियामकीय विषय हैं। NSE के मामले में अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की अनुमति नहीं है, इसलिए BSE उसका ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनेगा।
यहां एक और महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। NSE का मौजूदा IPO Offer for Sale यानी OFS है। इसमें कंपनी नए शेयर जारी नहीं कर रही है। मौजूदा शेयरधारक अपने पास मौजूद NSE के शेयरों का एक हिस्सा बेच रहे हैं। इसलिए IPO से मिलने वाली रकम NSE के पास नहीं जाएगी। शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को यह पैसा मिलेगा। मौजूदा योजना के तहत करीब 12.64 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी और ऊपरी मूल्य सीमा पर इश्यू का आकार करीब ₹22,562 करोड़ बैठता है।
यानी इस IPO से NSE में नई पूंजी नहीं आएगी और कंपनी की कुल इक्विटी भी इस इश्यू की वजह से नहीं बढ़ेगी। मुख्य बदलाव यह होगा कि NSE के शेयर पहली बार आम निवेशकों के लिए सार्वजनिक रूप से खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।
NSE का IPO लंबे समय से बाजार की नजर में रहा है। अब जब कंपनी सार्वजनिक बाजार में प्रवेश करने जा रही है, तो इसके शेयरों की लिस्टिंग BSE पर होना इस पूरे इश्यू का सबसे दिलचस्प पहलू बन गया है।
एक तरफ NSE खुद एक सूचीबद्ध कंपनी बनने जा रहा है, दूसरी तरफ उसके अपने शेयरों की ट्रेडिंग उस एक्सचेंज पर होगी जो उसका प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। यह स्थिति बाजार के उस नियामकीय ढांचे को भी दिखाती है जिसमें एक्सचेंज को अपने ही शेयरों की ट्रेडिंग और निगरानी के बीच संभावित हितों के टकराव से दूर रखा जाता है।