

नई दिल्ली : भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग ने ई-फास्ट इंडिया पहल के तहत PACT की शुरुआत की है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने सोमवार को 5वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 में इसका शुभारंभ किया। सम्मेलन में ZET मार्केटप्लेस भी शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य ई-ट्रक से जुड़े कारोबार और साझेदारियों को बढ़ावा देना है।
PACT के तहत शिपर्स, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, वाहन निर्माताओं, वित्तदाताओं, चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटरों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर माल ढुलाई की मांग को एकजुट किया जाएगा। इससे चिन्हित माल ढुलाई कॉरिडोर में शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, चार्जिंग ढांचे की योजना बनाने और इलेक्ट्रिक मध्यम एवं भारी-शुल्क वाहनों के लिए व्यावसायिक आधार मजबूत करने में मदद मिलेगी।
यह पहल ऐसे समय शुरू हुई है जब भारत में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई बाजार तेजी से बढ़ रहा है। ई-फ्रेट वाहनों की संख्या वित्त वर्ष 2025 के 201 से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 826 हो गई। वर्तमान में देशभर में 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक मध्यम और भारी-शुल्क ट्रक परिचालन में हैं।
राजीव गौबा ने कहा कि भारत ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षमता और नीतिगत तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। अब व्यापक स्तर पर बदलाव के लिए नए वित्तपोषण मॉडल, कॉरिडोर आधारित चार्जिंग ढांचा और बाजार संचालित साझेदारियां जरूरी हैं।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने लॉजिस्टिक्स संचालन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के वित्तपोषण और बैटरी प्रबंधन में नवाचार की जरूरत बताई। उनके अनुसार बेहतर बैटरी निगरानी और नए परिचालन मॉडल वित्तपोषण जोखिम कम कर निवेश बढ़ा सकते हैं।
ZET मार्केटप्लेस ई-ट्रक निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, चार्जिंग ऑपरेटरों, वित्तदाताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों को जोड़कर परियोजनाओं को योजना से क्रियान्वयन तक ले जाने में मदद करेगा। सम्मेलन में करीब 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।