जागरूकता बढ़ाने की जरूरत : RBI

निरंतर जागरूकता की ओर बढ़ने की आवश्यकता
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मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने बैंकों से पूरे साल मजबूत परिचालन अनुशासन और डेटा प्रशासन लागू करने को कहा है। उन्होंने कहा कि निगरानी को समय-समय पर ली जाने वाली रिपोर्ट के बजाय निरंतर जागरूकता की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। डिप्टी गवर्नर ने 'कॉलेज ऑफ सुपरवाइजर' के तीसरे वार्षिक वैश्विक सम्मेलन में 'डिजिटल युग में बैंकिंग निगरानी के मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर कहा कि दशकों से निगरानी करने वालों को बही-खाते पढ़ने और प्रक्रियाओं का निरीक्षण करने के लिए प्रशिक्षित किया गया और आज भी यह उसी तरह किया जा रहा है।

किसी एक घटना के कारण गंभीर संकट : आज एक बैंक कागजों पर बिल्कुल स्वस्थ दिख सकता है और फिर भी वह किसी एक घटना के कारण गंभीर संकट की कगार पर पहुंच सकता है। इसका कारण यह है कि महत्व का केंद्र अब 'शाखा और उत्पाद' से हटकर 'तकनीकी बुनियादी ढांचे और कोड' की ओर जा रहा है। स्वामीनाथन ने कहा कि दूसरे शब्दों में, स्थिरता अब परिचालन मजबूती, डेटा की अखंडता और बाहरी पक्षों पर निर्भरता पर उतनी ही आधारित है, जितनी की पूंजी और नकदी पर।

शुरुआती चेतावनी : डिजिटल वातावरण में एक कमजोर शिकायत प्रणाली केवल एक मामूली असुविधा नहीं है, बल्कि यह अक्सर एक शुरुआती चेतावनी होती है।निगरानी के लिहाज से हमें न केवल यह देखना होगा कि बैंक के पास शिकायत निवारण ढांचा है या नहीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि वह कैसा प्रदर्शन करता है। क्या शिकायतों का समय पर समाधान हो रहा है? क्या संस्थान मूल कारणों की पहचान कर उन्हें दूर कर रहे हैं, या वे केवल कागजों पर शिकायतों को बंद कर रहे हैं? क्या बोर्ड शिकायत के रुझान, बार-बार होने वाली विफलताओं और ग्राहकों की समस्याओं का स्पष्ट विवरण देख पा रहे हैं? और क्या वहां सक्रिय और तेजी से सुधार की व्यवस्था है।

पैनी नजर रखने की जरूरत : निगरानी को समय-समय पर मिलने वाली जानकारियों से हटकर लगातार जागरूकता की ओर बढ़ना चाहिए। साथ ही, इसे किसी एक संस्थान से आगे बढ़कर उसके पूरे परिवेश पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।

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