

नई दिल्ली : भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के तेजी से विस्तार के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की जरूरत भी बढ़ रही है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सौर और पवन ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को ग्रिड में प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) और पंप भंडारण परियोजनाओं का तेजी से विस्तार करना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने बैटरी सेल और अन्य भंडारण उपकरणों के घरेलू विनिर्माण की क्षमता तथा आने वाली मांग के बीच बड़े अंतर को रेखांकित किया है। उनका कहना है कि भंडारण प्रणालियों की धीमी तैनाती के लिए केवल आयात पर निर्भरता को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।
यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में प्रतिस्पर्धी निविदाओं के जरिये भारत में बैटरी भंडारण की अनुमानित मांग करीब 260 गीगावाट घंटा रहने की उम्मीद है, जबकि घरेलू बैटरी निर्माण की मौजूदा हिस्सेदारी इस मांग के मुकाबले एक प्रतिशत से भी कम है।
सनकाइंड इंडिया के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक हनीश गुप्ता ने कहा कि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और सौर उत्पादन को अधिकतम मांग के समय के साथ संतुलित करने के लिए बीईएसएस और पंप भंडारण परियोजनाएं तेजी से महत्वपूर्ण हो रही हैं।
प्रीमियर एनर्जीज के मुख्य कारोबार अधिकारी विनय रुस्तगी ने कहा कि बैटरी और अन्य ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियां सौर ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता से जुड़ी चुनौती को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे देश सौर ऊर्जा की अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगा।
वॉक्स एनर्जी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं सह-संस्थापक पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में ऊर्जा भंडारण की मांग घरेलू बैटरी सेल उत्पादन क्षमता से काफी आगे निकल चुकी है। उनके अनुसार, मांग और आपूर्ति के बीच यह अंतर कुछ तिमाहियों में दूर होने वाला नहीं है, बल्कि इसे पाटने में कई वर्ष लग सकते हैं।
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के समानांतर ऊर्जा भंडारण ढांचे में भी तेज निवेश करना होगा।