राष्ट्रीय आम दिवस : स्वाद से आगे बढ़कर बड़ा कारोबार, भारत के ‘फलों के राजा’ का वैश्विक बाजार में बढ़ता दबदबा

राष्ट्रीय आम दिवस पर फोकस: 1,000 से अधिक किस्मों वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक, फिर भी वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की अपार गुंजाइश
आम भारत में सिर्फ गर्मियों का पसंदीदा फल नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, खुदरा कारोबार और निर्यात से जुड़ा एक बड़ा कृषि-व्यवसाय है।
22 जुलाई को है राष्ट्रीय आम दिवस
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नई दिल्ली : आम भारत में सिर्फ गर्मियों का पसंदीदा फल नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, खुदरा कारोबार और निर्यात से जुड़ा एक बड़ा कृषि-व्यवसाय है। 22 जुलाई को राष्ट्रीय आम दिवस के अवसर पर आम की चर्चा स्वाद और संस्कृति से आगे बढ़कर अब इसके बढ़ते कारोबारी और निर्यात महत्व के संदर्भ में भी हो रही है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 30-35 प्रतिशत मानी जाती है। देश में आम की 1,000 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं, लेकिन घरेलू खपत इतनी बड़ी है कि भारत अपने विशाल उत्पादन का बहुत छोटा हिस्सा ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेज पाता है। यही वजह है कि आम के निर्यात में भारत के लिए अभी भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।

करीब 30 हजार टन ताजा आम का निर्यात

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 29,938 टन ताजे आम का निर्यात किया, जिसका मूल्य लगभग 5.65 करोड़ डॉलर रहा। संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और कतर भारतीय आम के प्रमुख बाजारों में शामिल रहे।

हालांकि, भारत की क्षमता इसके मुकाबले कहीं अधिक है। APEDA के एक बाजार विश्लेषण के अनुसार, भारत वैश्विक आम उत्पादन में करीब 30-35 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन वैश्विक निर्यात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 1 प्रतिशत के आसपास है। ऊंची लॉजिस्टिक्स लागत, कोल्ड चेन की सीमित उपलब्धता और कई देशों के कड़े गुणवत्ता एवं फाइटोसैनिटरी मानक निर्यात विस्तार की राह में प्रमुख चुनौतियां हैं।

निर्यात बढ़ाने के लिए समुद्री रास्ते पर जोर

निर्यात कारोबार को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भारत अब हवाई माल ढुलाई के साथ-साथ समुद्री परिवहन पर भी जोर दे रहा है। जून 2026 में APEDA और ICAR-CISH ने बेंगलुरु से सिंगापुर तक बांगनापल्ली आम की पहली वाणिज्यिक समुद्री खेप को सफलतापूर्वक भेजा। वैज्ञानिक समुद्री परिवहन प्रोटोकॉल से आम की शेल्फ लाइफ 30 दिन तक बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिससे कम लागत पर बड़े पैमाने पर निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्री परिवहन हवाई माल ढुलाई की तुलना में बड़े वॉल्यूम के लिए अधिक किफायती हो सकता है। इससे भारतीय आम को अधिक देशों में प्रतिस्पर्धी कीमत पर पहुंचाने और किसानों तथा निर्यातकों के लिए बेहतर बाजार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

ताजा फल से आगे बढ़ रहा आम का कारोबार

आम का कारोबार सिर्फ ताजा फल की बिक्री तक सीमित नहीं है। आम की प्रोसेसिंग से पल्प, जूस, नेक्टर, जैम, बेवरेज, आइसक्रीम, योगर्ट और कन्फेक्शनरी उद्योग को कच्चा माल मिलता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 63,253 टन से अधिक आम के पल्प का निर्यात किया, जिसका मूल्य करीब 8.03 करोड़ डॉलर रहा। सऊदी अरब, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा इसके प्रमुख बाजार रहे। आम पल्प उद्योग में आंध्र प्रदेश का चित्तूर और तमिलनाडु का कृष्णागिरी प्रमुख प्रसंस्करण केंद्र हैं। इसका अर्थ है कि आम की एक फसल किसान से लेकर प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग उद्योग, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, निर्यातक और विदेशी रिटेल बाजार तक पूरी वैल्यू चेन में आर्थिक गतिविधि पैदा करती है।

GI टैग और प्रीमियम ब्रांडिंग से बढ़ सकता है मूल्य

भारत की दशहरी, अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा, चौसा, बांगनापल्ली और जर्दालू जैसी किस्मों की क्षेत्रीय पहचान मजबूत है। GI टैग और ट्रेसबिलिटी के जरिए इन किस्मों को प्रीमियम उत्पाद के तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेश करने की क्षमता है। इस दिशा में गुणवत्ता, अवशेष-मुक्त उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय पैकेजिंग, प्रमाणन और बेहतर आपूर्ति शृंखला महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पश्चिम बंगाल के मालदा में भी निर्यात योग्य आम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए GAP प्रशिक्षण और खरीदार-विक्रेता बैठकें आयोजित की गई हैं।

जलवायु परिवर्तन भी कारोबार के लिए बड़ी चुनौती

आम का कारोबार मौसम पर अत्यधिक निर्भर है। 2026 में महाराष्ट्र के देवगढ़ क्षेत्र में खराब मौसम के कारण अल्फोंसो की फसल को भारी नुकसान की रिपोर्ट सामने आई। इससे किसानों, निर्यातकों और संबंधित पैकेजिंग कारोबार पर असर पड़ा। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण माल ढुलाई लागत और निर्यात समय में भी दबाव देखने को मिला। ऐसे में आम कारोबार के लिए बेहतर बागवानी तकनीक, मौसम-रोधी किस्में, वैज्ञानिक भंडारण और मजबूत कोल्ड चेन का विकास बेहद जरूरी है।

आम की असली कारोबारी क्षमता अभी पूरी तरह खुली नहीं

भारत के लिए आम का सबसे बड़ा अवसर यही है कि दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद वह अभी वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी उत्पादन क्षमता के अनुरूप हिस्सेदारी हासिल नहीं कर पाया है। यदि गुणवत्ता मानकों, समुद्री लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग पर ध्यान दिया जाए, तो आम किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारत के कृषि निर्यात को भी बड़ा सहारा दे सकता है।

राष्ट्रीय आम दिवस इसलिए केवल ‘फलों के राजा’ के स्वाद का उत्सव नहीं है। यह उस विशाल कृषि-व्यवसाय की याद दिलाने का अवसर भी है, जिसमें भारतीय आम की मिठास को वैश्विक बाजार में बड़े आर्थिक अवसर में बदलने की क्षमता मौजूद है।

आम भारत में सिर्फ गर्मियों का पसंदीदा फल नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, खुदरा कारोबार और निर्यात से जुड़ा एक बड़ा कृषि-व्यवसाय है।
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