सुभाष चंद्रा मामले के बाद व्यक्तिगत गारंटरों की दिवाला प्रक्रिया पर सख्ती की तैयारी

सुभाष चंद्रा केस में भारी कर्ज के मुकाबले मामूली पुनर्भुगतान पर मंजूरी के बाद आईबीबीआई ने व्यक्तिगत गारंटरों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया में कड़े सुरक्षा उपायों और सख्त नियमों का प्रस्ताव रखा
आईबीबीआई ने इस संबंध में जारी चर्चा पत्र पर 3 अक्टूबर तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं।
सुभाष चंद्रा मामले के बाद व्यक्तिगत गारंटरों की दिवाला प्रक्रिया पर सख्ती की तैयारी
Published on

नई दिल्ली : मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के मामले में ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत दावों के मुकाबले महज ₹6.25 करोड़ के भुगतान वाले पुनर्भुगतान प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। इसके मद्देनजर भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने कॉरपोरेट कर्ज के व्यक्तिगत गारंटरों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया में सुरक्षा उपाय कड़े करने के लिए चार अहम संशोधन प्रस्तावित किए हैं।

3 अक्टूबर तक मांगी सार्वजनिक टिप्पणियां

आईबीबीआई ने इस संबंध में जारी चर्चा पत्र पर 3 अक्टूबर तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं। बोर्ड का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य बैंकों और अन्य कर्जदाताओं को कंपनी की कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में मिलने वाली सुरक्षा के समान संरक्षण देना है।

दिए गए तीन प्रस्ताव

पहले प्रस्ताव के तहत गारंटर से संबंधित पार्टी के रूप में परिभाषित कर्जदाता को पुनर्भुगतान योजना पर मतदान से बाहर किया जाएगा। आईबीबीआई के मुताबिक मौजूदा नियमों में ‘एसोसिएट’ पर रोक है, लेकिन ‘रिलेटेड पार्टी’ की परिभाषा व्यापक है। इस अंतर का फायदा उठाकर गारंटर के प्रभाव वाली संस्थाएं मतदान में हिस्सा ले सकती हैं।

दूसरे प्रस्ताव में समाधान पेशेवर को प्रक्रिया के दौरान ही कम कीमत पर संपत्ति हस्तांतरण, तरजीही लेनदेन और अत्यधिक ब्याज वाले ऋण जैसे संदिग्ध लेनदेन की जांच करनी होगी। इसकी जानकारी मतदान से पहले कर्जदाताओं को देनी होगी और कानूनी कार्रवाई के लिए उनकी मंजूरी जरूरी होगी।

तीसरे प्रस्ताव में गारंटर की संपत्तियों का अनिवार्य मूल्यांकन प्रस्तावित है। पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता संपत्तियों का उचित और वास्तविक वसूली योग्य मूल्य तय करेगा। चौथे प्रस्ताव में कर्जदाताओं की आपत्तियों, विचार-विमर्श और निर्णय के कारणों को बैठक की कार्यवाही में विस्तार से दर्ज करना अनिवार्य होगा, खासकर तब जब प्रस्तावित भुगतान स्वीकृत दावों या संपत्तियों के अनुमानित मूल्य से बहुत कम हो।

सुभाष चंद्रा मामले में एनसीएलटी ने दी थी राहत

सुभाष चंद्रा मामले में 25 अगस्त को एनसीएलटी की एकल पीठ ने ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.25 करोड़ के पुनर्भुगतान प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बैंकों ने आरोप लगाया कि कुछ गैर-बैंकिंग संस्थाएं गारंटर की एसोसिएट या संबंधित पक्ष थीं और उनके प्रभाव में योजना को आगे बढ़ाया गया। 1 सितंबर को एनसीएलटी की पांच सदस्यीय पीठ ने आदेश पर रोक लगाते हुए चंद्रा को अपनी संपत्तियां हस्तांतरित करने से रोक दिया।

सीबीआई ने चंद्रा के खिलाफ दर्ज किया था मामला

अलग मामले में सीबीआई ने चंद्रा और अन्य के खिलाफ एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस को कथित तौर पर ₹1,322 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। शिकायत के मुताबिक 2018 में चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी पर दो ऋण सुविधाएं मंजूर की गई थीं। बाद की आईबीसी कार्यवाही में उनकी कथित संपत्ति और पहले दिए गए नेटवर्थ प्रमाणपत्रों के बीच बड़े अंतर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in