

नयी दिल्ली : देश के प्रमुख बंदरगाहों ने वर्ष 2025-26 में 91.51 करोड़ टन माल का प्रबंधन किया, जो 90.4 करोड़ टन के वार्षिक लक्ष्य से अधिक है। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह एक साल पहले की तुलना में 7.06 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है, जो क्षेत्र में मजबूत सुधार, दक्षता में वृद्धि और टिकाऊ वृद्धि की पुष्टि करता है। 2025-26 में पोत परिवहन मंत्रालय और उससे जुड़े संगठनों का कुल पूंजीगत व्यय 14,953 करोड़ रुपये रहा, जो 2024-25 के 9,708 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) के कार्यक्रम में यह बात कही। सोनोवाल ने समुद्र आधारित ‘ब्लू इकोनॉमी’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य समुद्री संसाधनों का अंधाधुंध दोहन नहीं, बल्कि उनका टिकाऊ और जिम्मेदार उपयोग कर आर्थिक विकास और रोजगार सृजन सुनिश्चित करना है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी बनाए रखना है।
बेड़े में 94 जहाज जोड़े गए : वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय ध्वज वाले बेड़े में 94 जहाज जोड़े गए, जिनकी कुल वहन क्षमता 25.67 लाख डेडवेट टन (डीडब्ल्यूटी) है, जबकि एक साल पहले 45 जहाज (7.72 लाख डीडब्ल्यूटी) शामिल किए गए थे। देश में केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले कुल 12 प्रमुख बंदरगाह हैं जो प्रमुख बंदरगाह प्राधिकार अधिनियम 2021 के प्रावधानों के तहत संचालित होते हैं। सोनोवाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय समुद्री कार्यबल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और नाविकों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है।
शीर्ष तीन देशों में शामिल : भारत फिलहाल वैश्विक समुद्री कार्यबल में लगभग 12 प्रतिशत योगदान के साथ शीर्ष तीन देशों में शामिल है और 2030 तक इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में तट-आधारित नौकरियों के लिए कौशल विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है और सरकार उभरते तथा बहु-विषयक क्षेत्रों में समुद्री शिक्षा का विस्तार कर रही है।11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 111 राष्ट्रीय जलमार्ग और प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्गों पर रणनीतिक स्थिति भारत को एक महत्वपूर्ण समुद्री राष्ट्र बनाती है। उन्होंने ‘मैरिटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरिटाइम अमृतकाल विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों का उद्देश्य अगले दो दशकों में भारत को एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।